Vastu Tips for Home: घर बनाते समय लोग अक्सर नक्शा, कमरों की जगह और सुविधाओं का ध्यान रखते हैं, लेकिन वास्तु शास्त्र में घर की दिशा और अलग-अलग हिस्सों की स्थिति को भी महत्वपूर्ण माना जाता है. खासकर पूजा घर को लेकर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि मंदिर किस दिशा में बनाया जाए, जिससे घर में सकारात्मक माहौल बना रहे और सुख-समृद्धि आए. दरअसल, ज्योतिष और वास्तु से जुड़े जानकार इसके लिए कुछ दिशाओं को महत्वपूर्ण बताते हैं.
इस बारे में लोकल 18 से बातचीत में अंबाला के लाल किताब एस्ट्रोलॉजर कुमार गौरव ने बताया कि हर व्यक्ति धन और तरक्की चाहता है और इसके लिए मेहनत भी करता है. उनके अनुसार ज्योतिष में ग्रहों के प्रभाव और वास्तु को भी महत्वपूर्ण माना जाता है. उन्होंने बताया कि घर बनवाने से पहले आर्किटेक्ट से नक्शा तैयार कराया जाता है, लेकिन वास्तु के हिसाब से घर की दिशा और अलग-अलग हिस्सों की स्थिति पर भी ध्यान दिया जा सकता है.
मंदिर के लिए ईशान कोण है सबसे उत्तम
कुमार गौरव बताते हैं कि वास्तु मान्यताओं में घर के मंदिर के लिए ईशान कोण यानी नॉर्थ-ईस्ट दिशा को शुभ माना जाता है. उनका कहना है कि इस दिशा में पूजा स्थल बनाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का वातावरण बनाए रखने की मान्यता है. इस जगह परिवार अपनी श्रद्धा के अनुसार देवी-देवताओं की मूर्तियां या तस्वीरें रख सकता है और नियमित रूप से पूजा-पाठ कर सकता है.
अलमारी और धन संचय के लिए उत्तर दिशा
वहीं एस्ट्रोलॉजर कुमार गौरव ने बताया कि घर में मंदिर के साथ-साथ सामान रखने की जगह और अलमारी की दिशा पर भी वास्तु में ध्यान दिया जाता है. उनके अनुसार अलमारी का मुख उत्तर दिशा की ओर रखने की सलाह दी जाती है. वास्तु मान्यताओं में उत्तर दिशा को कुबेर की दिशा माना जाता है, इसी वजह से लोग धन और समृद्धि से जुड़ी मान्यताओं के चलते इस दिशा का ध्यान रखते हैं.
रसोई घर के लिए आग्नेय कोण और अग्नि तत्व का संबंध
वहीं घर में किचन की दिशा को लेकर भी उन्होंने जानकारी दी. कुमार गौरव के अनुसार वास्तु शास्त्र में किचन के लिए साउथ-ईस्ट यानी दक्षिण-पूर्व दिशा को महत्वपूर्ण माना गया है. उनका कहना है कि इसी स्थान पर भोजन तैयार किया जाता है और वास्तु मान्यताओं के अनुसार इस दिशा का संबंध अग्नि तत्व से माना जाता है. उन्होंने मंगल और शुक्र ग्रह से जुड़ी मान्यताओं का भी उल्लेख किया.
संपूर्ण संरचना के आधार पर ही संभव है वास्तु का सटीक आकलन
कुमार गौरव ने बताया कि केवल किसी एक दिशा के आधार पर पूरे घर के वास्तु का आकलन नहीं किया जा सकता. घर किस दिशा में बना है, उसका कैंपस कैसा है और अलग-अलग कमरों व सामान की स्थिति क्या है, इन सभी बातों को देखकर ही वास्तु का आकलन किया जाता है. इसी वजह से उन्होंने कहा कि घर के वास्तु को समझने के लिए पूरी संरचना और दिशाओं को देखना जरूरी होता है.
उन्होंने बताया कि पलंग को लेकर भी वास्तु में अलग-अलग मान्यताएं हैं, हालांकि किसी घर की स्थिति को समझने के लिए केवल पलंग की दिशा देखकर निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता. इसके लिए घर की पूरी दिशा और उसमें रखे सामान की स्थिति को देखना जरूरी है. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर वास्तु विशेषज्ञ कैंपस और घर की दिशाओं का आकलन कर सलाह दे सकते हैं.
मेहनत, प्रबंधन और वास्तु का संतुलन
वास्तु और ज्योतिष से जुड़ी इन बातों को मान्यताओं के रूप में देखा जाता है और घर में सुख-समृद्धि के लिए मेहनत, सही वित्तीय प्रबंधन और परिवार का सहयोग भी महत्वपूर्ण है. वहीं, अगर कोई व्यक्ति वास्तु मान्यताओं को मानता है तो घर बनाते या पूजा स्थल तैयार करते समय ईशान कोण, उत्तर दिशा और दक्षिण-पूर्व दिशा से जुड़ी इन बातों पर ध्यान दे सकता है.