लखीमपुर में दो महीनें से जारी है शारदा नदी का कटान, प्राचीन मंदिर समेत 40 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि नदी में समाई, ग्रामीणों का छलका दर्द

लखीमपुर में दो महीनें से जारी है शारदा नदी का कटान, प्राचीन मंदिर समेत 40 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि नदी में समाई, ग्रामीणों का छलका दर्द


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लखीमपुर खीरी में शारदा नदी का जलस्तर घटने से कटान तेज हो गया है. गोला तहसील क्षेत्र के रूरा सुल्तानपुर गांव में शारदा नदी का कटान ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है. यहां देखते ही देखते प्राचीन दुर्गा मंदिर नदी की धारा में समा गया. ग्रामीणों के मुताबिक, मंदिर काफी पुराना था और यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते थे. लोग मंदिर में पूजा-अर्चना कर अपनी मनोकामना मांगते थे. अब शारदा नदी का कटान धीरे-धीरे मंदिर को भी अपने आगोश में ले गया, जिससे ग्रामीणों में दुख और चिंता का माहौल है.

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लखीमपुरः उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में इन दिनों शारदा नदी की तबाही का मंजर लगातार जारी है. एक ओर जहां शारदा नदी का जलस्तर कम हुआ है, वहीं दूसरी ओर जलस्तर घटते ही कटान की रफ्तार तेज हो गई है. नदी के लगातार कटान से ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ है. कृषि योग्य जमीन लगातार नदी में समाती जा रही है. किसानों के सामने अपनी जमीन और फसलों को बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है.

गोला तहसील क्षेत्र के रूरा सुल्तानपुर गांव में शारदा नदी का कटान ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है. यहां देखते ही देखते प्राचीन दुर्गा मंदिर नदी की धारा में समा गया. ग्रामीणों के मुताबिक, मंदिर काफी पुराना था और यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते थे. लोग मंदिर में पूजा-अर्चना कर अपनी मनोकामना मांगते थे. अब शारदा नदी का कटान धीरे-धीरे मंदिर को भी अपने आगोश में ले गया, जिससे ग्रामीणों में दुख और चिंता का माहौल है.

दो महीने से कटान कर रही है घाघरा

ग्रामीणों का कहना है कि शारदा नदी पिछले करीब दो महीने से लगातार कटान कर रही है. नदी का जलस्तर बढ़ने के दौरान कटान की रफ्तार कुछ कम हो जाती है, लेकिन जैसे ही जलस्तर नीचे जाता है, नदी की धारा तेजी से जमीन को काटने लगती है. इसी कटान के चलते गांव की जमीन लगातार नदी में समाती जा रही है. ग्रामीण दिनेश कुमार ने बताया कि पिछले करीब दो महीने से गांव के आसपास लगातार कटान हो रहा है. जलस्तर कम होते ही कटान की रफ्तार बढ़ जाती है. इसी कटान की चपेट में आकर प्राचीन दुर्गा मंदिर नदी में समा गया. ग्रामीण के मुताबिक, अब तक करीब छह से अधिक घर भी नदी में समा चुके हैं। इसके अलावा किसानों की कृषि योग्य जमीन और तैयार होती फसलें भी लगातार नदी की धारा में समा रही हैं.

खतरे में गांव का आस्तित्व

दिनेश कुमार का कहना है कि अगर कटान इसी तरह जारी रहा तो आने वाले समय में गांव के अस्तित्व पर भी संकट खड़ा हो सकता है. ग्रामीणों का आरोप है कि कटान को रोकने के लिए प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है. ग्रामीण नदी के किनारे कटानरोधी कार्य कराए जाने और प्रभावित परिवारों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग कर रहे हैं. वहीं किसान रामसागर ने बताया कि शारदा नदी उनके खेत की करीब तीन एकड़ जमीन को अपने आगोश में ले चुकी है. उन्होंने बताया कि खेती ही परिवार की आय का प्रमुख जरिया थी. उन्होंने खेत में धान और गन्ने की फसल लगाई थी, लेकिन फसल तैयार होने से पहले ही नदी की तेज धारा ने उनकी जमीन और फसल को अपने आगोश में ले लिया.

खेती की भूमि नदी में समा रही हैं

रामसागर के मुताबिक, जमीन नदी में समाने के बाद अब परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है. मजबूरी में वह मेहनत-मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं. उनका कहना है कि किसानों ने पूरे साल की मेहनत और उम्मीद के साथ फसल तैयार की थी, लेकिन नदी के कटान ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया. शारदा नदी के लगातार कटान से रूरा सुल्तानपुर गांव के ग्रामीणों के सामने अब दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है. एक तरफ लोगों को अपने घर और जमीन बचाने की चिंता है, तो दूसरी ओर किसानों की फसलें और कृषि योग्य भूमि लगातार नदी में समाती जा रही है. प्राचीन धार्मिक स्थल के नदी में समाने से ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है.



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