नई दिल्ली (UPSC Female Chairpersons). संघ लोक सेवा आयोग यानी देश का वो महकमा, जिसके नाम से ही लाखों युवाओं के दिल की धड़कनें तेज हो जाती हैं. यूपीएससी के शताब्दी वर्ष समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाला आंकड़ा साझा किया. उन्होंने बताया कि यूपीएससी के पूरे इतिहास में अब तक केवल 4 महिलाएं ही अध्यक्ष पद तक पहुंच पाई हैं. इनमें से भी 3 महिला अध्यक्ष साल 2014 के बाद ही नियुक्त की गई हैं. इस बदलाव से साबित होता है कि देश के टॉप प्रशासनिक पदों पर महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है.
यूपीएससी का गौरवशाली इतिहास
संघ लोक सेवा आयोग की शुरुआत ब्रिटिश इंडिया के दौर में हुई थी. इसकी नींव 1926 में रखी गई थी और तब भारतीयों का इस परीक्षा में पास हो पाना नामुमकिन माना जाता था. वक्त बदला, देश आजाद हुआ और आजाद भारत ने यूपीएससी के सफर में भी बदलाव किया. धीरे-धीरे यूपीएससी में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने लगी और अध्यक्ष के तौर पर भी उन्हें जगह मिलने लगी. जानिए यूपीएससी अध्यक्ष के तौर पर कितनी महिलाएं इस पद तक पहुंची हैं.
1. रोज मिलियन बैथ्यू (Rose Millian Bathew): पूर्वोत्तर से निकलकर रचा इतिहास
यूपीएससी के इतिहास में पहली बार किसी महिला को अध्यक्ष बनने का गौरव पूर्वोत्तर भारत से ताल्लुक रखने वाली रोज मिलियन बैथ्यू (Rose Millian Bathew Kharbuli) को मिला. उन्होंने 23 सितंबर 1992 से लेकर 23 अगस्त 1996 तक इस पद की कमान संभाली थी.
2. रजनी राजदान (Rajni Razdan): 2014 के बाद बदलाव की पहली कैरियर
करियर और शिक्षा: रजनी राजदान का करियर ग्राफ बेहद प्रभावशाली रहा है. उन्होंने प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG) के साथ-साथ पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग में सचिव के रूप में काम किया. हरियाणा सरकार में भी कई अहम पद संभाले. उनकी छवि बेहद ईमानदार अफसर की रही है. अध्यक्ष के रूप में उनका कार्यकाल कुछ महीनों (नवंबर 2014 तक) का रहा. लेकिन उन्होंने 2014 के बाद महिला नेतृत्व की नई शुरुआत की.
3. प्रीति सूदन (Preeti Sudan): कोविड काल की रणनीतिकार और आयोग की दूसरी महिला अध्यक्ष
साल 2024 में जब प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हुई, तब 1983 बैच की आईएएस अधिकारी प्रीति सूदन को यूपीएससी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया. वह यूपीएससी के इतिहास में अध्यक्ष बनने वाली तीसरी महिला हैं. हरियाणा से ताल्लुक रखने वाली प्रीति सूदन आंध्र प्रदेश कैडर की अधिकारी रही हैं.
शिक्षा और करियर: प्रीति सूदन ने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (LSE) से पढ़ाई की है. लंबे करियर के दौरान उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग और रक्षा मंत्रालय जैसे अहम पदों पर सेवाएं दीं. कोविड-19 महामारी के दौरान देश की स्वास्थ्य नीति की मुख्य रणनीतिकार के रूप में उनका काम ऐतिहासिक रहा. ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ और ‘आयुष्मान भारत’ जैसी योजनाओं को जमीन पर उतारने में भी उनकी बड़ी भूमिका रही है.
4. अल्का सिरोही (Alka Sirohi): प्रशासनिक दक्षता की मिसाल
करियर ग्राफ: दशकों लंबे प्रशासनिक सफर में अल्का सिरोही ने केंद्र और राज्य सरकार के कई महत्वपूर्ण विभागों में अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया. उनकी कार्यशैली को बेहद अनुशासित और पारदर्शी माना जाता है. संघ लोक सेवा आयोग जैसी संस्था में उनकी नियुक्ति इस बात का प्रमाण थी कि बेहतरीन प्रशासनिक अनुभव रखने वाली महिलाएं इस सर्वोच्च पद को कितनी सुगमता से संभाल सकती हैं.
प्रशासनिक बदलावों की अनकही कहानी
इन प्रमुख चेहरों के अलावा आयोग के विभिन्न प्रशासनिक दौर में और कार्यवाहक या अन्य टॉप भूमिकाओं में महिला नेतृत्व का प्रभाव देखा गया है. 2014 के बाद से शासन के हर स्तर पर जेंडर न्यूट्रल और महिलाओं की नेतृत्व क्षमता को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया है. यूपीएससी जैसी संस्था में सिविल सेवा परीक्षा पास करने वाली बेटियों (जैसे कि पिछले कुछ सालों के परिणामों में टॉप रैंक हासिल करने वाली लड़कियां) का ग्राफ बढ़ा है. वहीं आयोग के टॉप पदों पर भी महिलाओं की बढ़ती उपस्थिति आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन रही है.