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Mumbai–Pune Expressway : केंद्रीय सड़क एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने पिछले दिनों दावा किया था कि उन्होंने करीब 27 साल पहले देश का पहला एक्सप्रेसवे बनाया था. इसमें आज भी एक गड्ढे तक नहीं हैं. आज भी यह सड़क शानदार स्थिति में है. उनके इस दावे के बाद तमाम लोग इस एक्सप्रेसवे के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहे हैं. अगर आपको भी इसकी जानकारी चाहिए तो यहां सारी डिटेल मिल जाएगी. यह एक्सप्रेसवे कितने पैसों में बना और इस पर रोजाना कितने रुपये का टोल कलेक्शन होता है.
नवीं मुंबई के कालमबोली इलाके से लेकर पुणे के किवाले तक बना यह एक्सप्रेसवे करीब 94.6 किलोमीटर लंबा है और इसे साल 2002 में शुरू किया गया था. तब इस सड़क को 30 साल तक ट्रैफिक संभालने के लिए बनाया गया था, लेकिन इस पर ट्रैफिक इतना ज्यादा बढ़ गया है कि अब इसे बढ़ाकर 10 लेन किए जाने की तैयारी है. अभी यह ई-वे 6 लेन का बना हुआ है. इस ई-वे पर कई बार भयंकर ट्रैफिक जाम भी लग जाता है और यात्रियों को 2-2 घंटे जाम में बिताना पड़ता है. खासकर लोनावला और खंडाला जैसे इलाकों के पास तो अक्सर जाम लग जाता है.
मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे को रोजाना करीब 40 से 45 हजार वाहनों को संभालने के लिए बनाया गया था, लेकिन फिलहाल इस रास्ते पर रोजाना करीब 1.5 लाख वाहन गुजरते हैं. वीकेंड पर तो 3 लाख से ज्यादा वाहन इस रास्ते पर उतर आते हैं. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का दावा है कि इतने हैवी ट्रैफिक के बावजूद इस सड़क पर कोई गड्ढा तक नहीं है. इस ई-वे को बनाने में तब 1,630 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे. ई-वे को महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ने बनाया था.
मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर करीब 2 टोल प्लाजा बनाए गए हैं. इस ई-वे को दोनों तरफ से 3-3 लेन का बनाया गया है. इसके जरिये दोनों शहरों के बीच आवाजाही में सिर्फ 2 घंटे का समय लगता है. इस पर कार के लिए 250 रुपये का टोल कलेक्शन लगता है, जबकि मल्टी एक्सेल ट्रेलर्स के लिए टोल की दर 1,750 रुपये है. इस पर कार के लिए स्पीड लिमिट 100 किलोमीटर प्रति घंटे की है तो घाट वाली जगह पर स्पीड लिमिट 60 किलोमीटर प्रति घंटे की हो जाती है. इसी तरह, बड़े वाहनों के लिए स्पीड लिमिट 80 किलोमीटर है तो घाट वाली जगह पर यह लिमिट 40 किलोमीटर प्रति घंटे हो जाती है.
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टोल कलेक्शन की बात करें तो यह देश का सबसे महंगा एक्सप्रेसवे है, जिस पर 3.80 रुपये प्रति किलोमीटर टोल वसूला जाता है. इसका मतलब है कि इस ई-वे पर रोजाना करीब साढ़े 5 करोड़ रुपये का टोल वसूला जाता है, जबकि महीनेभर में कुल टोल कलेक्शन 167 करोड़ रुपये के आसपास होता है. इसका मतलब है कि आज इस ई-वे पर हर साल 2 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का टोल कलेक्शन हो जाता है. इसका मतलब है कि जितना पैसा इसे बनाने में लगा है, उससे ज्यादा की वसूली हर साल होती है.
मुंबई-पुणे ई-वे पर बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए साल 2030 तक इसे बढ़ाकर 10 लेन का करने की तैयारी है. MSRDC ने इस सड़क को 10 लेन का करने की जिम्मेदारी ली है, जिसका निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया गया है. ई-वे के दोनों तरफ दो-दो लेन की सड़क और बनाई जाएगी. MSRDC का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण के लिए सबसे बड़ी चुनौती निर्माण के दौरान रास्ते को खुला रखने की है. यह देश की सुपर बिजी सड़क है और इस पर ट्रैफिक रोककर काम करना संभव नहीं है. ऊपर से ब्रिज, अंडरपास बारिश में चट्टानों के गिरने से यह सड़क और जोखिम भरी हो जाती है.
मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर करीब 4 टनल बनाई गई है, जिसकी कुल लंबाई 6 किलोमीटर के आसपास है. यह सभी टनल घाट एरिया में बनाए गए हैं. इसमें सबसे बड़ी टनल भाटन टनल है. इसके अलावा कामशेट टनल, मादप टनल और अदोशी टनल हैं. यह सभी टनल पश्चिमी घाट में बनाए गए हैं. इन टनल के जरिये ही ई-वे से गुजरना आसान होता है. घाट वाले इलाके में सामान्य सड़कों से गुजरना खतरनाक होता है, लेकिन टनल बनने के बाद यह सफर काफी आसान हो जाता है.
मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर ट्रैफिक को कम करने के लिए ही एक और मिसिंग लिंक बनाया गया है. मई, 2026 में इस सड़क को शुरू किया गया है. 13.3 किलोमीटर लंबे इस बायपास को खंडाला घाट सेक्शन पर हैवी ट्रैफिक को कम करने के लिए बनाया गया है. इस सेक्शन पर 2 बड़ी टनल बनाई गई है. इसमें से छोटी टनल 1.6 किलोमीटर लंबी है तो बड़ी वाली टनल 8.9 किलोमीटर लंबी बनाई गई है. यह टनल लोनावला झील के नीचे बनी है. इससे मुंबई-पुणे के बीच का रास्ता करीब 6 किलोमीटर कम हो जाएगा और 25 मिनट का समय भी बचेगा.