UPSC Foundation Day History: 100 साल का इतिहास, अंग्रेजों के ‘एलीट क्लास’ से कैसे आम बच्चों का सपना बन गया UPSC?

UPSC Foundation Day History: 100 साल का इतिहास, अंग्रेजों के ‘एलीट क्लास’ से कैसे आम बच्चों का सपना बन गया UPSC?


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UPSC Completes 100 Years: संघ लोक सेवा आयोग ने 1 अक्टूबर 2026 को अपनी स्थापना के 100 साल पूरे कर लिए हैं. 1926 के ली कमीशन से लेकर आज के डिजिटल और एआई युग तक, देश की सबसे प्रतिष्ठित चयन संस्था की ऐतिहासिक यात्रा बेहद प्रेरणादायक है.

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UPSC Foundation Day History: यूपीएससी की शुरुआत 1926 में हुई थी (फोटो- एआई)

नई दिल्ली (UPSC Foundation Day History). देश के लाखों युवा आईएएस या आईपीएस अफसर बनने का सपना देखते हैं. इसके जरिए वे देश की व्यवस्था को दिशा देना चाहते हैं. इस सपने को पंख देने वाले संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने अपनी स्थापना के गौरवशाली 100 साल पूरे कर लिए हैं. 1 अक्टूबर 1926 को जिस संस्था की नींव रखी गई थी, उसने आज एक सदी पूरी कर ली है. इस ऐतिहासिक मौके पर दिल्ली के भारत मंडपम में भव्य शताब्दी समारोह का आयोजन किया गया है. इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत देश के कई दिग्गज शामिल हुए हैं.

यूपीएससी ने पिछले 100 सालों में देश को असंख्य शानदार प्रशासनिक अधिकारी दिए हैं. किसी भी देश की प्रशासनिक व्यवस्था कितनी मजबूत होगी, यह इस पर निर्भर करता है कि वहां अधिकारियों का चयन कैसे हो रहा है. संघ लोक सेवा आयोग ने 100 वर्षों में निष्पक्षता और सख्त चयन प्रक्रिया के जरिए देश का लोकतंत्र मजबूत बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई है. ब्रिटिश काल में जब इसकी शुरुआत हुई थी, तब इसका स्वरूप और उद्देश्य बिल्कुल अलग था. लेकिन समय के साथ UPSC ने खुद को बदला, तकनीक को अपनाया और आज यह दुनिया की सबसे निष्पक्ष और कठिन परीक्षाओं में से एक का संचालन करती है.

1926 से शुरुआत: ली कमीशन की सिफारिशों पर बना था पहला आयोग

यूपीएससी की शुरुआत ब्रिटिश भारत में हुई थी. साल 1924 में ‘ली कमीशन’ की सिफारिशों के आधार पर देश में संवैधानिक पब्लिक सर्विस कमीशन के गठन का रास्ता साफ हुआ. 1 अक्टूबर 1926 को देश में पहले पब्लिक सर्विस कमीशन की स्थापना हुई. तब इसका मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश शासन के प्रशासनिक कामकाज के लिए अधिकारियों का चयन करना था. आजादी के बाद जब 26 जनवरी 1950 को देश का संविधान लागू हुआ, तब इसे आधिकारिक तौर पर ‘संघ लोक सेवा आयोग’ यानी UPSC का संवैधानिक दर्जा मिला. तब से लेकर आज तक यह संस्था पूरी ऑटोनॉमी और निष्पक्षता के साथ अपने कर्तव्यों का पालन कर रही है.

आईसीएस से आधुनिक सिविल सेवा परीक्षा तक का सफर

शुरुआत में इसे ‘इंडियन सिविल सर्विस’ (ICS) कहा जाता था. इसमें भारतीयों का चयन बेहद कठिन था. साल 1863 में सत्येंद्रनाथ टैगोर (रवींद्रनाथ टैगोर के बड़े भाई) आईसीएस परीक्षा पास करने वाले पहले भारतीय थे. आजादी के बाद इस प्रक्रिया को लोकतांत्रिक बनाया गया, जिससे देश के किसी भी कोने से ताल्लुक रखने वाले सामान्य परिवार का युवा भी अपनी मेहनत के दम पर देश का टॉप अधिकारी बन सके. आज यूपीएससी सालभर में करीब 250 से ज्यादा अलग-अलग रिक्रूटमेंट परीक्षाएं और इंटरव्यू आयोजित करती है. इसमें सिविल सर्विसेज के अलावा इंजीनियरिंग, मेडिकल और डिफेंस से जुड़े पद भी शामिल हैं.

बदलाव की बयार: परीक्षा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी

बीते कुछ दशकों में यूपीएससी परीक्षा के पैटर्न और उम्मीदवारों की डेमोग्राफिक्स में क्रांतिकारी बदलाव आए हैं. शुरुआती आंकड़ों पर नजर डालें तो 1952 में जहां केवल 3 महिला उम्मीदवार ही रिकमेंड हुई थीं. वहीं हालिया सिविल सेवा परीक्षाओं में महिलाओं का डंका बज रहा है. साल 2025 के फाइनल यूपीएससी रिजल्ट में ही करीब 31% से ज्यादा पदों पर महिलाओं का चयन हुआ और टॉप-25 रैंक में भी बेटियों ने बाजी मारी. इससे साबित होता है कि यह संस्था अब समाज के हर वर्ग को समान अवसर देने के मामले में बेहद प्रगतिशील हो चुकी है.

कागज से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तक का तकनीकी सफर

वक्त के साथ यूपीएससी ने खुद को बहुत अपडेट किया है. साल 1978 में कंप्यूटर का इस्तेमाल शुरू हुआ, 1989 में ओएमआर (OMR) तकनीक आई और साल 2000 के आस-पास ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हुई. आज के दौर में परीक्षा की शुचिता और सुरक्षा बनाए रखने के लिए आयोग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बेस्ड फेशियल ऑथेंटिकेशन, यूनिवर्सल रजिस्ट्रेशन नंबर (URN) और डिजिटल हेल्पडेस्क जैसी मॉडर्न तकनीकें अपना ली हैं. यूपीएससी का 100 साल का सफर सिखाता है कि परंपरा की मजबूती के साथ अगर समय के हिसाब से तकनीक को अपना लिया जाए तो कोई भी संस्था इतिहास रच सकती है.



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