हथियार छोड़ किताबों से दोस्ती, 8 नक्सलियों ने पास की 10वीं की परीक्षा, गीता नारोटे की है सबसे अलग कहानी

हथियार छोड़ किताबों से दोस्ती, 8 नक्सलियों ने पास की 10वीं की परीक्षा, गीता नारोटे की है सबसे अलग कहानी


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बस्तर में आत्मसमर्पण के बाद पूर्व नक्सलियों के जीवन में बदलाव की एक अलग तस्वीर सामने आई है. कभी जंगलों में हथियार लेकर संगठन के लिए काम करने वाले बस्तर संभाग के 8 पूर्व नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ ओपन स्कूल से 10वीं की परीक्षा पास कर ली है. इनमें दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी से जुड़े स्टेट कमेटी सदस्य रहे भास्कर भी शामिल हैं. वहीं आत्मसमर्पण के बाद इन पूर्व नक्सलियों को शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण से जोड़ने की कोशिश भी की जा रही है.

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10वीं पास करने वाले 8 पूर्व नक्सली में से एक गीता नारोटे की कहानी

बस्तर में आत्मसमर्पण के बाद बस्तर संभाग के 8 पूर्व नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ ओपन स्कूल से 10वीं की परीक्षा पास कर ली है. इसी कड़ी में जिन लोगों की पढ़ाई में रुचि थी, उन्हें ओपन स्कूल के जरिए 10वीं की परीक्षा देने का अवसर मिला. खास बात यह है कि परीक्षा देने वाले सभी 8 पूर्व नक्सली सफल रहे. इनमें गीता नारोटे की कहानी सबसे अलग है.

महाराष्ट्र के गढ़चिरौली की रहने वाली गीता ने पारिवारिक परिस्थितियों के कारण छठवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी. बाद में वह नक्सली संगठन में शामिल हो गईं और करीब दो दशक तक संगठन में रहते हुए उन्होंने घायल नक्सलियों के उपचार का काम करना शुरू किया. टांके लगाने, इंजेक्शन देने और दवाइयों की जानकारी के चलते उन्हें संगठन में नक्सली डॉक्टर गीता के नाम से भी पुकारने लगे थे.

संगठन छोड़ किताबों को बनाया हथियार
आत्मसमर्पण के बाद गीता ने एक बार फिर पढ़ाई शुरू की. 35 साल की उम्र में उन्होंने 10वीं की परीक्षा प्रथम श्रेणी से पास की है. अब वह आगे की पढ़ाई जारी रखकर नर्स बनने का सपना देख रही हैं. इधर तेलंगाना के रहने वाले भास्कर का नाम बस्तर के नक्सली आंदोलन से लंबे समय तक जुड़ा रहा. 90 के दशक में संगठन के सामान्य सदस्य के तौर पर शुरुआत करने वाला भास्कर समय के साथ संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों तक पहुंचा और दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के स्टेट कमेटी का सदस्य रहा.

बस्तर में लंबे समय तक रहने के दौरान भास्कर ने हिंदी सीखी और किताबों में उसकी रुचि बढ़ी. आत्मसमर्पण के बाद इसी रुचि को उसने पढ़ाई में बदला और छत्तीसगढ़ ओपन स्कूल से 10वीं की परीक्षा देकर प्रथम श्रेणी हासिल कर ली है. भास्कर का कहना है कि उसने संगठन में रहते हुए हथियार चलाने का प्रशिक्षण लिया, लेकिन अब वह किताबों को अपना हथियार बनाकर आगे बढ़ना चाहता है. उसका लक्ष्य आगे पढ़ाई करना और अपने समाज में शिक्षा के लिए काम करना है.

8 आत्मसमर्पित नक्सलियों ने 10वीं की परीक्षा की पास
वहीं आई जी बस्तर बद्रीनारायण मीणा ने बताया कि छत्तीसगढ़ पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पित नक्सलियों को उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार अलग-अलग प्रशिक्षण दिया जा रहा है. जिन लोगों ने शिक्षा में रुचि दिखाई, उन्हें ओपन स्कूल के जरिए परीक्षा देने का अवसर उपलब्ध कराया गया. साथ ही कहा कि बस्तर संभाग से कुल 8 आत्मसमर्पित नक्सलियों ने 10वीं की परीक्षा दी और सभी सफल रहे. इनमें 6 बस्तर से कांकेर और बीजापुर से एक-एक परीक्षार्थी शामिल होकर परीक्षा पास कर ली है. आगे भी यदि ये पूर्व नक्सली पढ़ाई जारी रखना चाहते हैं तो पुलिस विभाग की ओर से मदद दी जाएगी.

वहीं, आत्मसमर्पण के बाद इन पूर्व नक्सलियों को शिक्षा के साथ-साथ रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं. ऐसे में 10वीं की परीक्षा पास करना उनके लिए सिर्फ एक शैक्षणिक उपलब्धि नहीं, बल्कि लंबे समय बाद सामान्य जीवन की ओर बढ़ने की एक नई शुरुआत भी है. जिन हाथों में कभी हथियार हुआ करते थे, उन्हीं हाथों में अब किताब है. एक ऐसी तस्वीर, जिसमें जंगल के रास्ते से निकलकर शिक्षा के रास्ते पर आगे बढ़ने की कोशिश दिखाई दे रही है.



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