नई दिल्ली (SSC CGL Exam Attendance Analysis). सरकारी नौकरी की चाहत रखने वाले ज्यादातर युवा एसएससी सीजीएल परीक्षा देते हैं. हाल ही में शुरू हुई एसएससी सीजीएल 2026 की टियर-1 परीक्षा के पहले दिन का नजारा देखकर हर कोई हैरान है. उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों के परीक्षा केंद्रों पर 60% से ज्यादा पंजीकृत उम्मीदवारों ने परीक्षा छोड़ दी. फॉर्म भरने के दौरान दिखने वाला उत्साह परीक्षा हॉल तक पहुंचते-पहुंचते गायब हो गया.
एसएससी में बंपर भर्तियों के बावजूद युवा क्यों छोड़ रहे हैं परीक्षा?
एसएससी परीक्षा के लिए तैयारी पूरी न होना या आखिरी वक्त का डर परीक्षा छोड़ने के मुख्य कारण हो सकते हैं. वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में तर्क दिया जा रहा है कि प्राइवेट सेक्टर में बढ़ते मौकों और अन्य करियर ऑप्शंस के चलते अब युवा आंख मूंदकर फॉर्म भरने के बजाय बहुत नप-तुले कदम उठा रहे हैं. वजह चाहे जो भी हो, लेकिन परीक्षा का लो टर्नआउट साबित करता है कि सिर्फ कागजी फॉर्म भरने वालों की संख्या और असल में परीक्षा देने वालों की संख्या में जमीन-आसमान का फर्क आ चुका है.
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एसएससी भर्ती में कहां कितने पद?
एसएससी सीजीएल रिक्रूटमेंट ड्राइव बेहद खास है. इसके जरिए केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों में कुल 10,731 पद भरे जाएंगे. इसमें अनारक्षित वर्ग के लिए 4412, OBC के लिए 2772, EWS के लिए 1028, एससी के लिए 1715 और एसटी के लिए 804 पद तय हैं. सबसे बड़ा आकर्षण सीबीआईसी (CBIC) और सीबीडीटी (CBDT) का है, जहां इंस्पेक्टर (सेंट्रल एक्साइज) से लेकर टैक्स असिस्टेंट तक के हजारों पद हैं. इतनी बड़ी संख्या में सरकारी नौकरी होने के बाद भी युवाओं का परीक्षा छोड़ना विरोधाभास पैदा करता है.
परीक्षा छोड़ने के पीछे हो सकते हैं मनोवैज्ञानिक कारण
इस ट्रेंड की गहराई से पड़ताल की गई तो कुछ दिलचस्प बातें सामने आईं.
- पहला और सबसे बड़ा कारण ‘टारगेटेड स्टडी’ की कमी है. कई युवा बिना तैयारी के सिर्फ दोस्तों की देखा-देखी या माता-पिता के दबाव में फॉर्म भर देते हैं. जब परीक्षा नजदीक आती है तो उन्हें अपनी नाकामी का अहसास होने लगता है.
- दूसरा कारण एग्जाम का अत्यधिक दबाव और समय की पाबंदी है. CBT मोड वाले इस एग्जाम में मात्र 60 मिनट में 100 सवाल हल करने होते हैं. इसमें रीजनिंग, मैथ्स, इंग्लिश और GK के साथ नेगेटिव मार्किंग का खतरा भी होता है. इस हाई-प्रेशर माहौल से बचने के लिए कई अभ्यर्थी सेंटर ही नहीं जाते.
कम अटेंडेंस का कटऑफ पर क्या असर पड़ेगा?
भले ही बड़ी संख्या में उम्मीदवारों ने परीक्षा छोड़ दी हो, लेकिन इसका पॉजिटिव पहलू उन गंभीर अभ्यर्थियों के लिए है जो रात-दिन एक कर रहे हैं. 60 फीसदी से अधिक की एब्सेंस का मतलब है कि अब प्रतियोगिता का दायरा काफी हद तक कम हो गया है. भीड़ छंटने से टियर-1 की कटऑफ और ओवरऑल कॉम्पिटीशन पर सीधा असर पड़ेगा. जो एस्पिरेंट्स अपनी स्ट्रैटेजी को लेकर फोकस्ड हैं, उनके लिए अगले चरण यानी दिसंबर में होने वाले टियर-2 तक की राह थोड़ी आसान जरूर हो सकती है.