विवान मिला, पर कितने बच्चे अब भी तीनपहाड़ गिरोह के चंगुल में? बच्चों से चोरी करवाने वाले नेटवर्क का खुलासा, IMEI बदलकर बांग्लादेश तक पहुंचाते थे फोन

विवान मिला, पर कितने बच्चे अब भी तीनपहाड़ गिरोह के चंगुल में? बच्चों से चोरी करवाने वाले नेटवर्क का खुलासा, IMEI बदलकर बांग्लादेश तक पहुंचाते थे फोन


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Ranchi child kidnapping teen pahar gang exposed: तीन पहाड़ गिरोह न सिर्फ लोगो के पॉकेटमारी और मोबाइल स्नैचिंग में शामिल है, बल्कि ये गिरोह बच्चों की भी चोरी किया करता है. इस राज से पर्दा चुटिया थाना क्षेत्र स्थित रांची स्टेशन से 4 वर्षीय विवान के अपहरण से उठा. मामले में गिरोह के 5 शातिर पुलिस के हत्थे चढ़े हैं और इस पूरे सिंडिकेट के तार बांग्लादेश से भी जुड़े हैं. पूरी खबर विस्तार से आगे पढ़िये.   

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विवान अपहरण कांड में बड़ा खुलासा: तीन पहाड़ गिरोह सिर्फ पॉकेटमरी तक सीमित नहीं, इसकी नजर अब नन्हें बच्चों पर भी है.

रांची. रेलवे स्टेशन के बाहर अकेले बच्चे की रेकी, फिर अपहरण और उसके बाद चोरी की ट्रेनिंग. झारखंड के तीन पहाड़ गिरोह पर बच्चों को अपराध की दुनिया में धकेलने के ऐसे ही आरोप लगे हैं. छत्तीसगढ़ के विवान के अपहरण और साहिबगंज से उसकी बरामदगी के बाद पुलिस की जांच में कथित तौर पर बच्चों से चोरी करवाने और चोरी के मोबाइल खपाने वाले नेटवर्क का खुलासा हुआ है. इस मामले में पांच आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है.

रांची स्टेशन के बाहर से विवान का अपहरण

बच्चों को अपराध के धकेलने को लेकर तीन पहाड़ गिरोह बच्चों की चोरी किया करता है. इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए इस गैंग के गुर्गों ने छत्तीसगढ़ के विवान का अपहरण रांची स्टेशन के बाहर से उस वक्त किया गया जब वह अकेला था. पहले बच्चे की रेकी की गई और फिर मौका देख बच्चे को लेकर अपहरणकर्ता फरार हो गए. अपहरण के बाद अपहरणकर्ता उसे लेकर बस के माध्यम से साहिबगंज चले गए. गिरफ्तार आरोपियों में रोहित मुखर्जी, कयूम अंसारी, बिट्टु कुमार सिंह, छोटु कुमार और जमादार शेख शामिल है. जानकारी के मुताबिक, पहले रोहित की गिरफ्तारी धनबाद रेलवे स्टेशन से हुई, जिसके बाद इस पूरे मामले के राज से पर्दा उठता चला गया. उसी पूछताछ के आधार पर साहिबजगंज से बच्चे को बरामद किया गया, वहीं अन्य आरोपियोंको गिरफ्तारी की गई.

धनबाद स्टेशन से रोहित की गिरफ्तारी के बाद खुला राज

वहीं, जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं जिसमें ये बात भी सामने आई कि रोहित मुखर्जी उर्फ डॉन चारी के केस में जेल भेजे गए बच्चों को जमानत दिलाने में सहयोग करता था. इसके साथ यह भी कि वह लावारिस बच्चों को अपने गिरोह में शामिल कर अलग-अलग शहर के भीड़भाड़ वाले स्थानों से मोबाइल चोरी करवाने का काम करवाता था. पूछताछ में देश की सुरक्षा की दृष्टि से अहम जानकारी भी सामने आई है.

IMEI बदलकर बांग्लादेश तक मोबाइल खपाने का आरोप

बताया जाता है कि ये गिरोह मोबाइल के आइएमईआइ (IMEI) बदलकर देश में और  कई मोबाइल को बंगलादेश में भी इस गिरोह के द्वारा खपाया जाता था.  बच्चों को पहले पॉकेटमारी की सख्त ट्रेनिंग दी जाती थी, ट्रेनिंग ऐसी की पलक झपकते वो पॉकेटमारी कर लिया करते थे अगर कभी पकड़ा भी जाए तो उन्हें जल्द से जल्द छुड़वाने के तमाम इंतजाम इस गिरोह के द्वारा किया जाता था.  बकायदा प्रत्येक मोबाइल की चोरी पर एक तय कीमत वो दी जाती थी.

विवान मिला, लेकिन कितने बच्चे अब भी गिरोह के चंगुल में?

बहरहाल, गिरोह को डिकोड कर लिया गया हो, लेकिन अब भी कई सवाल हैं जिनके जवाब आने चाहिए. विवान की बरामदगी के बाद अब जांच का बड़ा सवाल यह है कि गिरोह ने अब तक कितने बच्चों को अपने नेटवर्क में शामिल किया? क्या दूसरे बच्चों का भी अपहरण किया गया था? और जो बच्चे चोरी के मामलों में पकड़े गए, वे अब कहां हैं? पुलिस के सामने गिरोह के पूरे नेटवर्क, मोबाइल की सप्लाई चेन और बच्चों की पहचान से जुड़े सवालों की जांच अहम होगी. उम्मीद है कि ये तमाम सवाल जरूर पुलिस के जांच में दायरे में रहेंगे.



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