बिना ब्राह्मण के भी कर सकते हैं पितरों का पिंडदान, आचार्य ने बताया सरल तरीका
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Pitru Paksha Upay: उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पंडित आनंद भारद्वाज ने लोकल 18 से कहा कि अगर पंडित पिंडदान कराने के लिए नहीं मिलते हैं, तो लोगों के मन में कई सवाल उठते हैं. इसके लिए भी शास्त्रों में समाधान बताया गया है.
उज्जैन. हिंदू धर्म में हर तिथि और वार का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है. वैदिक पंचांग के अनुसार, पितृपक्ष की शुरुआत भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से हो गई है और इसका समापन आश्विन मास की अमावस्या पर होगा. इस अवधि में श्रद्धालु अपने पूर्वजों को स्मरण कर उनके निमित्त तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितरों के लिए किए जाने वाले इन कर्मों का विशेष विधान बताया गया है. आमतौर पर पिंडदान पंडित या आचार्य के मार्गदर्शन में कराया जाता है लेकिन पंडित न होने की स्थिति में सरल विधि भी अपनाई जा सकती है.
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पंडित आनंद भारद्वाज ने लोकल 18 को बताया कि कई बार अगर पंडित यह कर्म कराने के लिए नहीं मिलते हैं, तो लोगों के मन में कई सवाल देखने को मिलते हैं. इसके लिए भी शास्त्रों में समाधान बताया गया है. भगवान सूर्य को जगत पंडित माना जाता है. यदि श्राद्ध कर्म के दौरान ब्राह्मण नहीं मिल पाते हैं, तो आप सूर्यदेव के सामने स्वयं खड़े होकर अपने पितरों का पिंडदान कर सकते हैं.
पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना
सूर्यदेव को जगत पंडित कहा गया है. उनके सामने खडे़ होकर स्वयं पिंडदान करने के लिए नदी में खड़े होकर अपने हाथ में जौ, तिल, चावल लेकर अपने पितरों का नाम लेकर भगवान सूर्य को अर्पित कर पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करनी चाहिए. जैसे पिंडदान में पंडित कई बार क्रिया करता है. ऐसे ही यह प्रक्रिया आपको 11 बार करनी पड़ेगी. इसके साथ ही कच्चा दूध, चावल के लड्डू, अदरक, सूखे आंवले और कच्ची सूत के धागे को जल में प्रवाहित करना होगा. इसके बाद दीपदान, तिलक, अक्षत, नारियल, फूल और मिठाई चढ़ाएं.
वस्त्रों का रखें विशेष ध्यान
यह पूरी क्रिया जब भी करें, तो यह जरूर ध्यान रखना चाहिए कि सिले हुए वस्त्र न पहनें, केवल साफ धोती पहनकर ही पिंडदान करना चाहिए. ऐसे पिंडदान करने से ही पूरी पितरों के समस्त दान-पुण्य या तर्पण जो भी करा हो, सम्पूर्ण होता है और पितृदेव प्रसन्न होते हैं.
इन उपायों से करें पितरों को प्रसन्न
1. पशु-पक्षियों को भोजन कराएं. गरीबों और ब्राह्मणों को सामर्थ्य के अनुसार दान करें.
2. घर में किसी भी प्रकार के शुभ कार्य या नए कार्य का शुभारंभ श्राद्ध के दौरान नहीं करना चाहिए.
3. पितृ स्तोत्र का पाठ करें. इससे भी पितर प्रसन्न होते हैं.