Last Updated:
Green chutney harm : मोमोज के साथ मिलने वाली तीखी लाल चटनी सेहत के लिए घातक है ये तो सभी जानते हैं. ऐसे में कई लोग इसकी जगह हरी मिर्च की चटनी खाना पसंद करते हैं. इसे स्वास्थ्य के लिहाज से अधिक सुरक्षित और हल्का माना जाता है, लेकिन ये भी गंभीर खतरा पैदा कर सकती है. देहरादून के आयुर्वेदिक चिकित्सक सिराज सिद्दीकी लोकल 18 से बताते हैं कि हरी मिर्च में कैप्साइसिन पाई जाती है, जिसकी अधिक मात्रा पेट की अंदरूनी परत को उत्तेजित कर सकती है. इससे एसिडिटी, सीने में जलन, पेट में मरोड़ और अल्सर तक हो सकता है.
देहरादून. उत्तराखंड के देहरादून में मोमोज के साथ तीखी लाल चटनी के बजाय हरी मिर्च की चटनी को अक्सर स्वास्थ्य के लिहाज से अधिक सुरक्षित और हल्का माना जाता है, लेकिन इसका अत्यधिक या नियमित सेवन भी सेहत के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है. देहरादून के आयुर्वेदिक चिकित्सक सिराज सिद्दीकी लोकल 18 से बताते हैं कि हरी मिर्च में मौजूद ‘कैप्साइसिन’ की अधिक मात्रा पेट की अंदरूनी परत को उत्तेजित कर सकती है. इससे एसिडिटी, सीने में जलन, पेट में मरोड़ और अल्सर जैसी समस्याएं पनपने का खतरा बढ़ जाता है. बाजारों या फूड स्टॉल्स पर मोमोज के साथ मिलने वाली चटनी में हरी मिर्च का तीखापन बनाए रखने के लिए सोडियम और प्रिजर्वेटिव्स की ज्यादा मात्रा का इस्तेमाल किया जाता है, जो पाचन तंत्र को बिगाड़ने के साथ-साथ हाई ब्लड प्रेशर और किडनी पर अतिरिक्त दबाव डालता है, इसलिए स्वाद के चक्कर में हरी चटनी को सुरक्षित समझकर रोजाना या ज्यादा मात्रा में खाने से बचें.
सीने में जलन, शरीर में हीट
डॉ. सिराज कहते हैं कि कैप्साइसिन के कारण शरीर में हीट बनती है. छोटे बच्चों के लिए लाल मिर्च हो या हरी मिर्च हो, दोनों ही नुकसानदायक हैं. कई लोग सोचते हैं कि छोटे बच्चों को हरी मिर्च में खाना बना कर देंगे तो नुकसान नहीं होगा. बच्चों की गट लाइनिंग बहुत नाजुक होती है, सेंसिटिव होने की वजह से बचपन में ही डैमेज हो सकती है और ज्यादा उम्र होने के बाद फिर ऐसे लोगों में पाचन से जुड़ी गंभीर समस्या भी हो जाती है. कई लोगों को खाना खाकर लेटने के बाद सीने में जलन होती है या नाक में भी गैस जैसी समस्या देखने के लिए मिलती है. ऐसे लोगों को हरी मिर्च का सेवन नहीं करना चाहिए.
ये लोग तो देखें भी नहीं
डॉ. सिराज कहते हैं कि फिशर और पाइल्स जैसी समस्या वाले लोगों को इससे दूर रहना चाहिए. जो लोग टाइफाइड से जूझ रहे हैं या उन्हें हाल ही में टाइफाइड हुआ और वह रिकवर करके अभी-अभी निकले तो उन्हें बिल्कुल भी हरी मिर्च का सेवन नहीं करना चाहिए. इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम से जूझने वाले लोग भी हरी मिर्च का सेवन बिल्कुल न करें. हरी मिर्च सिरोयसिस, एग्जिमा और रोजेशिया जैसी स्किन प्रॉब्लम भी बढ़ा सकती है.