घरों में सफाई का महौल तैयार हो रहा है, क्योंकि दिवाली आने वाली है. त्योहारों का मौसम लगभग आने को तैयार है और कई छुट्टियां भी. पर जहां लोग इसे लेकर उत्साहित हैं, वहीं दिल्लीवालों को इस मौसम के बदलते ही चिंता हो जाती है प्रदूषण की. जहरीली हवा और प्रदूषण जैसे दिल्ली-एनसीआर की हर साल की कहानी बन गया है. ग्रेटर नोएडा की एटीएस डोलसे सोसायटी में रहने वाली हाउस वाइफ प्राची जैन बताती हैं कि वो तय कर चुकी हैं, इस सर्दी जैसे ही दिल्ली में पॉल्यूशन बढ़ेगा भोपाल चली जाएंगी. प्राची कहती हैं, ‘हर साल पॉल्यूशन शुरू होते ही अक्सर बच्चों का स्कूल भी बंद हो जाता है, तो यहां क्यों रहना.’ प्राची अकेले ऐसा करने वाली नहीं है. नोएडा के सेक्टर 137 की सुपरटेक सोसायटी की सलोनी भी अपने दोनों बच्चों के साथ राजस्थान के किशनगढ़ में जाकर ही वर्क-फ्रॉम होम करने वाली हैं. कई और लोग भी सर्दियों में ‘गैस चेंबर’ बन जाने वाले दिल्ली-एनसीआर से दूर भागने लगते हैं. पहले ऐसा प्रदूषण बढ़ने पर होता था, लेकिन अब क्योंकि ये हर साल की कहानी हो गया है, इसलिए लोग पहले से ही प्लान बना रहे हैं.
प्रदूषण रोकने के लिए दिल्ली सरकार के कड़े निमय
दिल्ली की इस प्रदूषण की समस्या को देखते हुए इस साल सरकार ने अपनी तैयारी पहले से ही शुरू कर दी है. दिल्ली सरकार ने विंटर पॉल्यूशन एक्शन प्लान 2026-27 की घोषणा की है. यह योजना 1 नवंबर से 28 फरवरी तक लागू रहेगी. इसमें गाड़ियों, कंस्ट्रक्शन वर्क, ऑफिस और धूल पर सख्त पाबंदियां लगाई गई हैं. इस प्लान के तहत 1 नवंबर से 31 जनवरी तक सरकारी और प्राइवेट ऑफिस में सिर्फ 50% कर्मचारी ऑफिस आएंगे. बाकी वर्क फ्रॉम होम करेंगे, ताकि सड़कों पर गाड़ियां कम हों और पॉल्यूशन भी कम हो. हालांकि ये आदेश जरूरी सेवाओं जैसे अस्पताल, परिवहन, बिजली, पानी आदि पर लागू नहीं है.
दिल्ली सरकार ने विंटर पॉल्यूशन एक्शन प्लान 2026-27 की घोषणा की है. यह योजना 1 नवंबर से 28 फरवरी तक लागू रहेगी.
इसी प्लान के तहत सरकार ने 1 नवंबर से 28 फरवरी तक पार्किंग चार्ज भी दोगुना कर दिया है. हालांकि इसमे मेट्रो पार्किंग शामिल नहीं हैं. इसके अलावा 1 नवंबर से दिल्ली में बाहरी गाड़ियों, जो BS-VI मानकों पर नहीं हैं, एंट्री नहीं कर पाएंगी. इसके अलावा पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट (PUC) न होने पर पेट्रोल पंप पर ईंधन नहीं मिलेगा. दिल्ली में 1 नवंबर से 31 जनवरी तक धूल पैदा करने वाले बाहरी निर्माण और तोड़-फोड़ के काम भी बंद कर दिए गए हैं. जबकि 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक कंस्ट्रक्शन के काम और डेमोलिशन पर पूरी रोक लगा दी गई है. सरकार ने यह भी कहा है कि प्रदूषण बढ़ा तो ये नियम और भी सख्त हो सकते हैं.
खराब हवा शरीर पर कैसे असर डालती है?
दिल्ली-एनसीआर की ये प्रदूषण भरी हवा सिर्फ आंखों, सांस या फेफड़ों को ही नुकसान नहीं पहुंचाती. बल्कि इस जहरीली हवा में मौजूद PM2.5 और PM10 जैसे बारीक कण फेफड़ों में गहराई तक घुस, खून में मिलकर पूरे शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं. इस जहरीली हवा के चलते अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और COPD के मरीजों की हालत बिगड़ जाती है. इतना ही नहीं ये प्रदूषण दिल के दौरे और स्ट्रोक का खतरा बढ़ाता है. लंबे समय तक खराब हवा में रहने से ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है और धमनियां सख्त हो जाती हैं.
पॉल्यूशन के चलते आखों में रेडनेस, जलन, आंसू आना और स्किन पर एलर्जी आम शिकायतें हैं. इन बारीक कड़ों के शरीर में घुसने से सबसे ज्यादा खतरा बच्चों और बुजुर्गों को होता है. इससे बच्चों के फेफड़ों का विकास प्रभावित होता है. जबकि गर्भवती महिलाओं में समय से पहले प्रसव और कम वजन के बच्चे पैदा होने का खतरा बढ़ जाता है.
जहरीली हवा के चलते अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और COPD के मरीजों की हालत बिगड़ जाती है. (फाइल फोटो)
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन और कई स्टडीज ये बताती हैं कि लंबे समय तक इतने हाई पॉल्यूशन लेवल में रहने से पहले मौत का खतरा काफी बढ़ जाता है. हाल के दिनों में उत्तर भारत में हुई बारिश के चलते अभी दिल्ली-एनसीआर में AQI 50 से 70 के बीच चल रहा है. लेकिन हर साल सर्दियों के मौसम में दिल्ली वाले 250 से पार AQI में महीने भर से ज्यादा सांस लेते हैं. पिछले साल इसी प्रदूषण की वजह से कई लोगों की दिल्ली छोड़कर देश के अन्य शहरों में शिफ्ट होने की खबरें भी आई थीं. पंजाब-हरियाणा से आने वाला पराली का धुआं, आसपास के औद्योगिक इलाके और मौसम की स्थिति हर साल इस प्रदूषण की समस्या को बढ़ा देती हैं.
दिल्ली सरकार के ये सुरक्षात्मक कदम अच्छी कोशिश तो है पर देखना है कि ये कितना सुकून और चैन की सांस लोगों को लेने देगी.