‘नो UPI डे’ का ऐलान वापस, वित्त मंत्री से मुलाकात के बाद व्यापारियों ने बदला फैसला

‘नो UPI डे’ का ऐलान वापस, वित्त मंत्री से मुलाकात के बाद व्यापारियों ने बदला फैसला


Last Updated:

‘नो UPI डे’ का फैसला वापस ले लिया गया है. 2 अक्टूबर को UPI का इस्तेमाल नहीं करने की अपील करने वाले व्यापारिक संगठनों ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात के बाद अपना फैसला बदल दिया. बैठक में ₹2,000 से अधिक के UPI लेन-देन पर प्रस्तावित 0.40% MDR को लेकर व्यापारियों की चिंता पर चर्चा हुई. संगठनों ने कहा कि वे डिजिटल पेमेंट और UPI के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन ऐसी व्यवस्था चाहते हैं जिससे व्यापारियों और MSME पर अतिरिक्त बोझ न पड़े.

Zoom

व‍ित्‍त मंत्री से मुलाकात के बाद नो यूपीआई डे का फैसला टला.

यूपीआई इस्तेमाल करने वालों के लिए बड़ी खबर है. 2 अक्टूबर को ‘नो UPI डे’ मनाने का ऐलान अब वापस ले लिया गया है. ₹2,000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर प्रस्तावित 0.40% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर व्यापारियों के एक बड़े वर्ग ने विरोध जताया था. इसी विरोध में 2 अक्टूबर को UPI से दूरी बनाने का आह्वान किया गया था. अब व्यापारिक संगठनों के नेताओं की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात के बाद यह फैसला वापस ले लिया गया है.

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के राष्ट्रीय महामंत्री और चांदनी चौक से सांसद प्रवीन खंडेलवाल के नेतृत्व में करीब 20 वरिष्ठ व्यापारिक नेताओं ने वित्त मंत्री से मुलाकात की. बैठक में कारोबारियों ने ₹2,000 से ज्यादा के UPI लेन-देन पर 0.40% MDR लगाने के प्रस्ताव को लेकर अपनी चिंता बताई. व्यापारियों का कहना है कि डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है. ऐसे में अगर हर बड़े UPI लेन-देन पर दुकानदारों पर अतिरिक्त शुल्क आता है, तो खासकर छोटे और मध्यम कारोबारियों पर इसका असर पड़ सकता है.

‘नो UPI डे’ क्यों बुलाया गया था?

AICPDF और AIMRA समेत कुछ व्यापारिक संगठनों ने 2 अक्टूबर को ‘नो UPI डे’ मनाने का आह्वान किया था. इसका मकसद UPI को बंद करना नहीं, बल्कि प्रस्तावित MDR के खिलाफ सरकार तक अपनी बात पहुंचाना था. अब वित्त मंत्री के साथ हुई बातचीत के बाद दोनों संगठनों ने यह आह्वान वापस ले लिया है. व्यापारिक नेताओं के मुताबिक, सरकार ने उनकी चिंताओं पर उचित विचार करने का भरोसा दिया है.

दुकानदारों को किस बात की चिंता?

मान लीजिए किसी दुकान पर ग्राहक ने ₹10,000 का UPI पेमेंट किया. प्रस्तावित 0.40% MDR के हिसाब से शुल्क करीब ₹40 बनता है. कारोबारियों की चिंता है कि बड़ी संख्या में डिजिटल पेमेंट होने पर ऐसे छोटे-छोटे शुल्क मिलकर उनके खर्च को बढ़ा सकते हैं. खासकर छोटे दुकानदारों और कम मार्जिन वाले कारोबार में व्यापारी यह देखना चाहते हैं कि डिजिटल पेमेंट की सुविधा बनी रहे, लेकिन उसका खर्च सीधे उनकी जेब पर न आए.

व्यापारी बोले- UPI के खिलाफ नहीं

व्यापारिक संगठनों ने साफ किया कि उनका विरोध UPI से नहीं है. कारोबारियों का कहना है कि UPI ने देश में पेमेंट करना बेहद आसान बना दिया है. छोटी दुकान से लेकर बड़े स्टोर तक लोग इसका इस्तेमाल कर रहे हैं. उनका कहना है कि वे चाहते हैं कि डिजिटल पेमेंट का विस्तार जारी रहे, लेकिन ऐसी व्यवस्था बने जिसमें ग्राहक को भी सुविधा मिले और दुकानदार पर अतिरिक्त बोझ भी न पड़े.



Source link