चिप मेक‍िंग में टाटा ने 16 ग्लोबल कंपनियों से मिलाया हाथ, दो राज्‍यों के लिए दी तगड़ी न्यूज

चिप मेक‍िंग में टाटा ने 16 ग्लोबल कंपनियों से मिलाया हाथ, दो राज्‍यों के लिए दी तगड़ी न्यूज


आज के दौर में जिसके पास चिप यानी सेमीकंडक्टर है, दुनिया उसी की मुट्ठी में है. स्मार्टफोन से लेकर फाइटर जेट तक, सब कुछ इसी छोटी सी चिप पर टिका है. इस ग्लोबल रेस में भारत अब तेजी से गियर बदल रहा है और जब बात देश के भविष्य की हो, तो टाटा पीछे कैसे रह सकता है? सेमीकॉन इंडिया 2026 के मंच से टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने कुछ ऐसा ऐलान किया है, जिसने पूरी दुनिया के टेक बाजार का ध्यान खींच लिया है.

टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के सीईओ रणधीर ठाकुर ने बताया कि उनकी कंपनी इस इवेंट में कुल 16 बड़े समझौते साइन कर रही है. इसमें यूरोप, जापान, सिंगापुर, मलेशिया और अमेरिका की दिग्गज कंपनियां शामिल हैं. यूरोप से नेक्सपीरिया (Nexperia) और बेसी (BESI), जापान से जेएसआर (JSR) और फुजीफिल्म, मलेशिया से कॉलिंगटन जैसी ग्लोबल कंपनियों के साथ-साथ भारत की एलएंडटी (L&T) और गति शक्ति विश्वविद्यालय के साथ भी टाटा ने हाथ मिलाया है. यानी चिप बनाने की पूरी सप्लाई चेन का जुगाड़ टाटा ने सेट कर लिया है.

गुजरात और असम वालों के लिए खुशखबरी

अगर आप सोच रहे हैं कि सिर्फ कागजों पर साइन हो रहे हैं, तो ऐसा नहीं है. रणधीर ठाकुर ने साफ किया कि गुजरात के धोलेरा में बन रही उनकी सेमीकंडक्टर फैब यानी चिप बनाने की फैक्ट्री और असम में बन रही पैकेजिंग फैसिलिटी का काम एकदम बुलेट ट्रेन की रफ्तार से चल रहा है. सरकार को जो टाइमलाइन दी गई थी, काम बिल्कुल उसी तय समय पर पूरा हो रहा है. धोलेरा में इस फैक्ट्री को खड़ा करने के लिए कंस्ट्रक्शन से लेकर केमिकल तक के 450 से ज्यादा पार्टनर्स को एक साथ लाया गया है.

बंपर नौकरियां आएंगी, महिलाओं का दबदबा होगा

टाटा सिर्फ चिप नहीं बना रहा, बल्कि रोजगार की भी मशीन बन गया है. कंपनी ने अब तक 1.5 लाख से ज्यादा सीधे रोजगार पैदा किए हैं. सबसे शानदार बात ये है कि इस वर्कफोर्स में 65 फीसदी महिलाएं हैं, जिनमें से ज्यादातर देश के दूरदराज के गांवों से आती हैं. सीईओ का कहना है कि सेमीकंडक्टर सेक्टर में पैदा होने वाली एक नौकरी, इकोसिस्टम में 10 नई नौकरियां पैदा करती है.

भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स छलांग

टाटा के सीईओ ने भारत की तरक्की का जो रिपोर्ट कार्ड पेश किया, वो भी गजब है. 2014 में भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री महज 2 लाख करोड़ रुपये की थी, जो अब 2026 में 13 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गई है. सिर्फ पांच साल पहले ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ बना था और आज देश में 12 फैक्ट्रियां अलग-अलग स्तर पर काम कर रही हैं. भारत अब सिर्फ चिप मंगा नहीं रहा, बल्कि ‘मेड इन इंडिया’ चिप दुनिया भर के ग्राहकों को एक्सपोर्ट कर रहा है.



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