रेगिस्तान में बिखरी यूपी के पंचमेवा की खुशबू, 200 रुपये KG की मिठाई बनी लोगों की पसंद, रोज बिकती है 60 किलो

रेगिस्तान में बिखरी यूपी के पंचमेवा की खुशबू, 200 रुपये KG की मिठाई बनी लोगों की पसंद, रोज बिकती है 60 किलो


Last Updated:

Barmer: राजस्थान के बाड़मेर में इन दिनों उत्तर प्रदेश के बरेली का खास पंचमेवा भारी धूम मचा रहा है. यूपी से आए फूल सिंह और उनके साथी काजू, बादाम, नारियल बुरादा, सिंघाड़ा और इलायची से यह खास मिठाई तैयार कर रहे हैं. मात्र 200 रुपये प्रति किलो बिकने वाले इस स्वादिष्ट पंचमेवा की सोंधी खुशबू राहगीरों को अपनी ओर खींच रही है. बाड़मेर की सड़कों पर रोजाना इसकी 50 से 60 किलो तक की शानदार बिक्री हो रही है. किफायती दाम और बेमिसाल स्वाद के कारण स्थानीय लोग इस मिठाई के दीवाने हो गए हैं.

ख़बरें फटाफट

बाड़मेर. राजस्थान के सीमावर्ती और सरहदी जिले बाड़मेर की सड़कों पर इन दिनों एक अलग ही तरह की मिठास और खुशबू लोगों को अपनी ओर खींच रही है. यह मिठास रेगिस्तान के धोरों की नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश से आए खास ‘पंचमेवा’ की है. पश्चिमी सरहद पर बसे बाड़मेर में यूपी का यह पारंपरिक पंचमेवा इन दिनों भारी धूम मचा रहा है. राह चलते लोग इस खास मिठाई की सोंधी खुशबू से आकर्षित होकर इसे खरीदने के लिए ठेले तक खिंचे चले आ रहे हैं. सबसे बड़ी और हैरानी वाली बात यह है कि महंगे ड्राई फ्रूट्स से तैयार होने के बावजूद इसकी कीमत हर किसी के बजट में है, जिसके कारण यह मिठाई बाड़मेरवासियों की पहली पसंद बनती जा रही है.

इस पंचमेवा की सबसे खास बात इसके शुद्ध तत्व और शानदार खुशबू है. इसे तैयार करने में नारियल का बुरादा, पौष्टिक सिंघाड़ा, काजू, बादाम, शक्कर और खुशबूदार इलायची का प्रचुर मात्रा में इस्तेमाल किया जाता है. नारियल, काजू और बादाम के मिश्रण से तैयार होने के कारण यह न केवल खाने में बेहद स्वादिष्ट है, बल्कि सेहत के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. लोग इसे खुद तो चाव से खा ही रहे हैं, साथ ही अपने परिवार और बच्चों के लिए भी पैक करवा कर घर ले जा रहे हैं. बाजार में जहां सामान्य मिठाइयां काफी महंगी मिलती हैं, वहीं यह गुणवत्तापूर्ण मेवा हर किसी को लुभा रहा है.

बरेली के कारीगर बिखेर रहे स्वाद का जादू
बाड़मेर की सड़कों पर इस खास स्वाद को परोसने का काम उत्तर प्रदेश के बरेली निवासी फूल सिंह और उनके साथी कर रहे हैं. फूल सिंह के साथ धर्मवीर और विपिन भी इस पंचमेवा को बनाने और बेचने का काम पूरी लगन के साथ करते हैं. वे अपना राज्य छोड़कर राजस्थान के इस सरहदी इलाके में अपनी कला और स्वाद का जादू बिखेर रहे हैं. राह चलते लोग जब ठेले के पास से गुजरते हैं, तो ताज़ा बन रहे पंचमेवा की खुशबू उन्हें रुकने पर मजबूर कर देती है.

रोजाना 50 से 60 किलो की हो रही शानदार बिक्री
कारीगर फूल सिंह बताते हैं कि इस स्वादिष्ट पंचमेवा को तैयार करना कोई आसान काम नहीं है. एक बार का पंचमेवा तैयार करने में उन्हें करीब दो से ढाई घंटे का समय लगता है. इसमें नारियल बुरादा, सिंघाड़ा, काजू, बादाम, शक्कर और इलायची को एक निश्चित अनुपात में मिलाकर धीमी आंच पर पकाया जाता है. फूलसिंह बताते हैं कि इसमें मेहनत और समय दोनों काफी लगते हैं, लेकिन पूरी तरह तैयार होने के बाद इसका स्वाद लोगों को खूब पसंद आता है. बाड़मेर में पंचमेवा की मांग इतनी ज्यादा है कि रोजाना ठेले से करीब 50 से 60 किलो तक माल हाथों-हाथ बिक जाता है.

महज 200 रुपये प्रति किलो है कीमत
आज के समय में जब काजू और बादाम के भाव आसमान छू रहे हैं, ऐसे में यह पंचमेवा महज 200 रुपये प्रति किलो के हिसाब से ग्राहकों को बेचा जा रहा है. किफायती दाम और बेमिसाल स्वाद के कारण ही इसकी लोकप्रियता दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है. आम आदमी भी इसे आसानी से खरीद सकता है. रेगिस्तान के इस शहर में उत्तर प्रदेश के इस अनूठे स्वाद ने अपनी एक अलग और खास जगह बना ली है. स्थानीय लोग यूपी के इस जायके की जमकर तारीफ करते नजर आ रहे हैं.



Source link