सीएम सुक्खू ने हिमाचल का शिक्षा मॉडल कांग्रेस हाईकमान के सामने किया पेश, कैसे 21वें से तीसरे पायदान तक पहुंचे? सब बताया

सीएम सुक्खू ने हिमाचल का शिक्षा मॉडल कांग्रेस हाईकमान के सामने किया पेश, कैसे 21वें से तीसरे पायदान तक पहुंचे? सब बताया


शिमला. हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में अपने करीब पौने चार साल के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड कांग्रेस हाईकमान के सामने रखा है. कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और शिक्षा मंत्रियों की बैठक में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था में किए गए बदलावों और सरकार के शिक्षा मॉडल की विस्तार से जानकारी दी.

बैठक में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल मौजूद रहे. हिमाचल की ओर से शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर और तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने भी बैठक में हिस्सा लिया.

सरकार ने अपनी प्रस्तुति में स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक किए गए नीतिगत बदलावों और नई योजनाओं को प्रमुखता से रखा. खास बात यह रही कि उपलब्धियां गिनाने के साथ-साथ उच्च शिक्षा में सरकार के अधिकार क्षेत्र से जुड़े मुद्दों और सामने आई अड़चनों को भी हाईकमान के सामने रखा गया.

21वें पायदान से तीसरे स्थान तक पहुंचा हिमाचल

मुख्यमंत्री सुक्खू ने हिमाचल की शिक्षा व्यवस्था के 21वें पायदान से तीसरे स्थान तक पहुंचने को सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल किया. सरकार की ओर से शिक्षा क्षेत्र में किए गए सुधारों को लेकर बैठक में प्रस्तुति दी गई.इसके साथ ही हिमाचल के पूर्ण साक्षर राज्य का दर्जा हासिल करने, सरकारी स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम शुरू करने, 150 से अधिक सरकारी स्कूलों को सीबीएसई से संबद्ध करने की पहल और राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूलों के निर्माण को भी शिक्षा मॉडल की प्रमुख उपलब्धियों के तौर पर बताया गया.

शिक्षा व्यवस्था में बदलाव को हाईकमान के सामने रखा

सरकार की ओर से कहा गया कि सरकारी स्कूलों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के साथ शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर भी काम किया जा रहा है. राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूलों को सरकार ने ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को आधुनिक शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की अपनी प्रमुख पहल के रूप में प्रस्तुत किया. विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए विदेश एक्सपोजर विजिट का भी प्रस्तुति में उल्लेख किया गया. सरकार का कहना है कि ऐसे कार्यक्रमों से विद्यार्थियों और शिक्षकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा व्यवस्था और नई तकनीकों को समझने का अवसर मिल रहा है.

कुलपति नियुक्तियों के मुद्दे पर भी चर्चा

बैठक में सिर्फ स्कूली शिक्षा की उपलब्धियां ही नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा से जुड़े नीतिगत फैसलों और सरकार के सामने आई अड़चनों को भी रखा गया. सीएम ने हाईकमान को बताया कि सरकार ने विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्ति की प्रक्रिया में बदलाव के लिए विधानसभा से पारित विधेयक को मंजूरी के लिए लोकभवन भेजा था, लेकिन उस विधेयक पर लोकभवन की ओर से आपत्तियां लगाई गईं, जिसके बाद इसे दोबारा विधानसभा से पारित कर भेजना पड़ा.सरकार ने इस पूरे मामले को विश्वविद्यालयों में नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव और उसे अधिक पारदर्शी बनाने की अपनी पहल के तौर पर कांग्रेस हाईकमान के समक्ष रखा.

विवि में शिक्षक भर्ती प्रदेश लोक सेवा आयोग

विश्वविद्यालयों में भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी सरकार ने अपने फैसले बैठक में साझा किए. सरकार के अनुसार, विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती राज्य लोक सेवा आयोग के माध्यम से और गैर-शिक्षक कर्मचारियों की भर्ती कर्मचारी चयन आयोग के जरिए कराने का निर्णय लिया गया है. सरकार का तर्क है कि भर्ती प्रक्रिया को आयोगों के माध्यम से करवाने से पारदर्शिता और मेरिट सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी.

अंग्रेजी माध्यम से CBSE तक, फोकस सरकारी स्कूलों पर

सरकारी स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम की शुरुआत और CBSE से संबद्धता की पहल को भी सरकार ने अपनी शिक्षा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया. सरकार का कहना है कि सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को निजी स्कूलों के समान आधुनिक शैक्षणिक वातावरण और बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं. वहीं, राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूलों के निर्माण को भी इसी व्यापक बदलाव का हिस्सा बताया गया.



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