130 साल से नहीं बदला इस पकौड़ी का स्वाद, राजाओं से लेकर आज तक दीवाने हैं लोग
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Shahpura Famous Mirchi Bada: भीलवाड़ा के शाहपुरा में त्रिमूर्ति चौराहे पर स्थित ‘सोहन जी पकौड़ी-भुजिया’ अपनी 130 साल पुरानी विरासत और स्वाद के लिए मशहूर है. चार पीढ़ियों से चल रही इस दुकान के खट्टे-मीठे मिर्ची बड़े और अमचूर की चटनी का स्वाद लोगों को खूब पसंद आता है. इसका इतिहास राजघराने से जुड़ा है, जब राजाओं के शिकार से लौटने पर उनके लिए खास पकौड़ी बनती थी. आज भी इस प्रामाणिक स्वाद का आनंद लेने के लिए ग्राहकों की लंबी कतार लगती है. समय बदलने के बावजूद इसका पारंपरिक जायका और लोकप्रियता आज भी पूरी तरह कायम है.
भीलवाड़ा में पारंपरिक स्वाद के शौकीनों की कोई कमी नहीं है. आज हम आपको जिले के शाहपुरा में मिलने वाले एक ऐसे खास स्वाद के बारे में बता रहे हैं, जो लंबे समय से लोगों की पसंद बना हुआ है. यहां की गलियों में मिलने वाली पारंपरिक पकौड़ी और मिर्ची बड़े का स्वाद लोगों को बरसों से अपनी ओर आकर्षित करता रहा है. इन्हीं में सोहन जी पकौड़ी वाले की पकौड़ी और मिर्ची बड़े का नाम खास तौर पर लिया जाता है. शाहपुरा में यह परिवार चार पीढ़ियों से पारंपरिक तरीके से पकौड़ी और मिर्ची बड़े तैयार करता आ रहा है, जिसका स्वाद आज भी लोगों के बीच लोकप्रिय बना हुआ है.
शाहपुरा के त्रिमूर्ति चौराहे पर मिलने वाली इन पकौड़ियों का स्वाद चखने के लिए लोगों में खासा उत्साह रहता है. यहां आलू और मिर्ची की पकौड़ी के साथ मिर्ची बड़े भी ग्राहकों के बीच काफी पसंद किए जाते हैं. कई बार भीड़ अधिक होने पर ग्राहकों को अपनी बारी के लिए करीब आधे घंटे तक इंतजार करना पड़ता है, लेकिन स्वाद के दीवाने लोग इसके लिए भी तैयार रहते हैं. यहां आने वाले ग्राहकों के बीच कई बार मजाकिया अंदाज में यह भी चर्चा होती रहती है कि सबसे पहले पकौड़ी कौन घर लेकर जाएगा.
सोहन जी पकौड़ी-भुजिया वाले की खास पहचान यहां मिलने वाले मिर्ची बड़े हैं. इनका स्वाद सामान्य मिर्ची बड़े से अलग खट्टा-मीठा बताया जाता है. मिर्ची बड़े के साथ परोसी जाने वाली अमचूर की चटनी इसके स्वाद को और खास बना देती है. खट्टी-मीठी चटनी और मसालेदार मिर्ची बड़े का यह स्वादिष्ट मेल लोगों को खूब पसंद आता है, जिसके चलते कई ग्राहक खास तौर पर इसी स्वाद का आनंद लेने यहां पहुंचते हैं.
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इस पकौड़ी की खासियत सिर्फ इसके स्वाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे करीब 130 साल पुरानी परंपरा भी जुड़ी हुई है. परिवार के अनुसार, उनके पूर्वजों के समय से ही शाहपुरा के राजघराने तक उनकी पकौड़ी पहुंचती रही है. बताया जाता है कि उस दौर में तत्कालीन राजा को भी परिवार के दादा द्वारा पकौड़ी का स्वाद परोसा गया था. परिवार की पुरानी स्मृतियों के अनुसार, राजघराने की ओर से उन्हें हर महीने एक रुपये दिए जाने की बात भी इस परंपरा का हिस्सा रही है.
सोहन जी बताते हैं कि राजघराने के लिए खास तरीके से पकौड़ी तैयार की जाती थी. जब राजा-महाराजा शिकार पर जाते थे और लौटकर महल पहुंचते थे, तब उनकी पसंद के अनुसार पकौड़ी बनाई जाती थी. राजघराने से जुड़ी यह पुरानी परंपरा समय के साथ आम लोगों के बीच भी इस पकौड़ी की पहचान बनाती चली गई. परिवार ने पीढ़ी-दर-पीढ़ी पकौड़ी के स्वाद और इसे तैयार करने की पारंपरिक शैली को कायम रखा, जिसके चलते आज भी इस दुकान को शाहपुरा के पुराने और पारंपरिक स्वाद से जोड़कर देखा जाता है.
समय के साथ शाहपुरा में बदलाव आया और खान-पान के तौर-तरीके भी बदले, लेकिन सोहन जी पकौड़ी-भुजिया वाले के स्वाद की लोकप्रियता आज भी बरकरार है. परिवार की ओर से आज भी आलू-मिर्ची की पकौड़ी और मिर्ची बड़े पारंपरिक तरीके से तैयार किए जाते हैं. स्थानीय लोगों के अलावा शाहपुरा आने वाले कई लोग भी इस पुराने स्वाद का आनंद लेने के लिए त्रिमूर्ति चौराहे पहुंचते हैं. खासतौर पर गर्मागर्म पकौड़ी और खट्टे-मीठे स्वाद वाले मिर्ची बड़े लोगों को खूब पसंद आते हैं.
शाहपुरा की पहचान सिर्फ उसकी ऐतिहासिक विरासत तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां के पारंपरिक स्वाद भी स्थानीय संस्कृति का अहम हिस्सा हैं. करीब चार पीढ़ियों से चली आ रही सोहन जी पकौड़ी-भुजिया की परंपरा इसकी मिसाल है. करीब 130 साल पुराने इस स्वाद का आकर्षण आज भी बरकरार है और ग्राहकों की लंबी कतार के बीच गर्मागर्म पकौड़ी और खट्टे-मीठे मिर्ची बड़े शाहपुरा के लोकप्रिय पारंपरिक स्वादों में अपनी खास जगह बनाए हुए हैं.