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नेपाल में बारिश होने और नदियों के पानी बढ़ने के साथ ही बिहार में भी बारिश से तेज बाढ़ आ गई. इससे बिहार के कई इलाके पूरी तरह से डूब गए. कई गांव तबाह हो गए और शहरों में लोगों के मकान डूब गए. लोगों का सड़क मार्ग का संपर्क टूट गया. कई जगह अचानक बांध टूट जाने का डर बना हुआ है तो कई जगह बांध टूटने से गांव डूब गए. बाढ़ लोगों की मुसीबत के साथ ही उनकी जान के लिए भी खतरा बना हुआ है. पश्चिम चंपारण के कई गांव एक झटके में डूब गए. लोगों को भागने का भी मौका मुश्किल से मिला.
आशीष कुमार/पश्चिम चम्पारण: बिहार में बाढ़ का भारी कहर देखने को मिला. कई लोगों को जान-माल का भारी नुकसान हुआ. यहां डूबते गांव, सिसकती जिंदगियां और आंखों के सामने बहते घरों ने आत्मा को झकझोर दिया. जिले के नौतन और बैरिया प्रखंड की सीमा पर बसे लोग भी बाढ़ के दर्द से गुजर रहे हैं. सोमवार रात करीब 2 बजे चंपारण तटबंध के टूटने से नौतन के शिवराजपुर सहित बैरिया के पुलिया खाड़ स्थित कई गांव जलमग्न हो गए. सोमवार सुबह मंगलपुर कला और विशम्भरपुर के कई गांव डूबने के बाद आस पास के गांव के लोगों में भी भारी डर है. स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मदद की गुहार लगाई, लेकिन लोगों के पास तक जन प्रतिनिधि से लेकर जिला प्रशासन तक कोई नहीं पहुंचा.
आधी रात टूट गया बांध
आपको बता दें कि गंडक बैराज से पानी को डिस्चार्ज करने के साथ ही इधर गंडक की लहरों में तेजी आने लगी और बढ़ते जल स्तर ने आगे के गांवों को भी अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया. शाम ढलने के बाद बचे हुए गांवों में भी पानी घुसने लगी, जो देर रात प्रचंड धार में तब्दील हो गई. देखते ही देखते जल की तीव्र धाराओं ने नौतन स्थित चम्पारण तटबंध को बुरी तरह से तोड़ दिया, जिससे जल का प्रवाह गांव की तरफ होने लगा और कुछ ही देर में पूरा गांव डूब गया.
पल भर में डूब गया पूरा गांव
स्थानीय निवासी फूलमती देवी बताती हैं कि सोमवार रात क़रीब दो बजे तटबंध से एक तेज आवाज़ आई और पूरे गांव में चीख पुकार मच गई. ऐसे में जब वह घर से बाहर निकलीं तो अपनी आंखों के सामने नदी की तेज लहर और डूबते घरों को देख बुरी तरह से डर गई. इससे पहले कि वो कुछ समझ पाती, उनका घर में पूरी पानी में डूबने लगा. ऐसे में अपनी जान की हिफाजत करते हुए उन्होंने सबकुछ छोड़ नाव के सहारे तटबंध का रुख किया.
नहीं मिला संभलने का मौका
सुबह होने के साथ उन्होंने देखा कि उनके घर के साथ उसमें रखी सभी चीजें बह गई थी और सब कुछ बर्बाद हो चुका था. कुछ ऐसा ही कहना है कि स्थानीय निवासी राम मांझी यादव का.तटबंध के टूटने के बाद गंडक की तेज लहरों ने किसी को भी संभालने का मौका नहीं दिया.आंखों के सामने सबकुछ डूबता रहा, लेकिन किसी की भी हिम्मत नहीं हुई कि वो कुदरत के इस कहर का सामना कर सकें.
लोगों में आक्रोश
हद तो तब हो गई जब मंगलवार सुबह तक सब कुछ डुबाने के बाद गंडक की धार नौतन के बाजारों तक जाने लगीं, लेकिन इसके बावजूद भी वहां न तो राहत दल की मौजूदगी हुई और न ही जन प्रतिनिधियों का आगमन. ऐसे में प्रभावित लोग बुरी तरह से आक्रोशित हैं और अपनी किस्मत को कोस रहे हैं.