पत्तियों से बनता है सिक्किम का ये अनोखा फूड, नाम है गुन्द्रुक, जानें कैसे होता है तैयार

पत्तियों से बनता है सिक्किम का ये अनोखा फूड, नाम है गुन्द्रुक, जानें कैसे होता है तैयार


Last Updated:

सिक्किम का गुन्द्रुक अपनी अनोखी बनाने की प्रक्रिया और खट्टे स्वाद के लिए जाना जाता है. हरी पत्तेदार सब्जियों को खास तरीके से फरमेंट करके तैयार किया जाने वाला यह पारंपरिक फूड पहाड़ी खान-पान का खास हिस्सा है.

ख़बरें फटाफट

Zoom

सिक्किम की पहाड़ी रसोई में कई ऐसी पारंपरिक चीजें मिलती हैं, जिनके पीछे स्वाद के साथ-साथ खाना बचाकर रखने की पुरानी समझ भी छिपी है. इन्हीं में से एक है गुन्द्रुक. यह कोई साधारण सूखी सब्जी नहीं, बल्कि हरी पत्तियों को प्राकृतिक तरीके से खमीर उठाकर यानी फरमेंट करके तैयार किया जाने वाला पारंपरिक भोजन है. सिक्किम के अलावा हिमालयी इलाकों और नेपाल में भी इसे खाया जाता है.

गुन्द्रुक मुख्य रूप से सरसों, मूली, राई जैसी पत्तेदार सब्जियों और कुछ जगहों पर फूलगोभी या पत्तागोभी की पत्तियों से बनाया जाता है. ताजी पत्तियों को पहले साफ किया जाता है और कुछ समय के लिए मुरझाने दिया जाता है. इसके बाद इन्हें हल्का कुचला जाता है और एक बर्तन में दबाकर रखा जाता है. यहीं से इसकी खास प्रक्रिया शुरू होती है.

इस दौरान पत्तियों में मौजूद प्राकृतिक सूक्ष्मजीवों की मदद से फरमेंटेशन होता है. इससे पत्तियों में हल्का खट्टापन और अलग तरह की खुशबू व स्वाद विकसित होता है. वैज्ञानिक अध्ययनों में गुन्द्रुक के फरमेंटेशन में लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया की भूमिका भी सामने आई है.

कैसे बनाया जाता है गुन्द्रुक?

सबसे पहले ताजी हरी पत्तियों को अच्छी तरह साफ किया जाता है. इसके बाद उन्हें कुछ समय के लिए धूप में या हवा में रखकर थोड़ा मुरझाया जाता है, ताकि उनमें मौजूद अतिरिक्त पानी कम हो जाए. फिर पत्तियों को छोटे टुकड़ों में काटकर हल्का कुचला जाता है.

अब इन पत्तियों को साफ बर्तन में भरकर अच्छी तरह दबाया जाता है. पारंपरिक तरीकों में मिट्टी के बर्तन या दूसरे बंद बर्तनों का इस्तेमाल किया जाता रहा है. पत्तियों को दबाकर रखने का उद्देश्य उनके बीच की हवा कम करना होता है. इसके बाद बर्तन को बंद करके कुछ दिनों के लिए सामान्य तापमान पर फरमेंट होने दिया जाता है. पारंपरिक तरीकों में यह समय समुदाय और मौसम के हिसाब से बदल सकता है, कई विधियों में करीब 7 से 10 दिन और कुछ अध्ययनों में इससे लंबी अवधि भी दर्ज की गई है.

जब पत्तियों में अच्छा खट्टापन आ जाता है, तो उन्हें बर्तन से निकालकर धूप में अच्छी तरह सुखाया जाता है. सूखने के बाद गुन्द्रुक को लंबे समय तक रखा जा सकता है और जरूरत के अनुसार इस्तेमाल किया जाता है.

गुन्द्रुक खाया कैसे जाता है?

सूखे गुन्द्रुक को सीधे खाने के बजाय आमतौर पर पानी में भिगोकर नरम किया जाता है. इसके बाद इससे खट्टी सब्जी, सूप या दूसरी पारंपरिक डिश तैयार की जाती है. कई जगह इसे चावल के साथ भी परोसा जाता है. इसका स्वाद हल्का खट्टा और काफी अलग होता है, इसलिए पहली बार खाने वालों को भी यह सामान्य सब्जियों से बिल्कुल अलग लग सकता है.



Source link