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GST काउंसिल की इस बार मीटिंग का फोकस टैक्स रेट बदलने से ज्यादा GST की पूरी प्रक्रिया को आसान बनाने पर दिख रहा है. लेट फीस, पेनल्टी, रजिस्ट्रेशन, ITC, रिफंड और ई-इनवॉइस जैसे मुद्दे सीधे कारोबारियों के रोजमर्रा के काम से जुड़े हैं. हालांकि ध्यान रखना जरूरी है कि ऊपर बताए गए बदलाव अभी प्रस्ताव और विचार के स्तर पर हैं. अंतिम फैसला 7 अक्टूबर की GST काउंसिल बैठक के बाद ही साफ होगा.
जीएसटी काउंसिल की मीटिंग में कई फैसलों पर लग सकती है मुहर.
ई-कॉमर्स कारोबारियों और छोटे दुकानदारों के लिए GST से जुड़ी कई मुश्किलें कम हो सकती हैं. 7 अक्टूबर 2026 को होने वाली GST काउंसिल की बैठक में इस बार टैक्स की दरों के बजाय GST की प्रक्रिया को आसान बनाने पर फोकस रहेगा. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी कह चुकी हैं कि बैठक में ई-इनवॉइसिंग, इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC और दूसरी प्रक्रिया से जुड़े सुधारों पर चर्चा होगी.
सीएनबीसी आवाज को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, सबसे बड़ी राहत छोटे कारोबारियों को मिल सकती है. प्रस्ताव के मुताबिक, जिन कारोबारियों का सालाना टर्नओवर 5 करोड़ रुपये तक है और वे रिटर्न समय पर भरते हैं, उन्हें कुछ मामलों में लेट फीस से राहत देने पर विचार हो सकता है. यानी छोटे कारोबारियों पर सिर्फ कागजी देरी की वजह से लगने वाला अतिरिक्त बोझ कम किया जा सकता है. यह अभी प्रस्ताव है, अंतिम फैसला GST काउंसिल की बैठक में ही होगा.
25 हजार की पेनल्टी घटाकर 10 हजार करने की तैयारी
GST में सामान्य पेनल्टी को लेकर भी बदलाव की तैयारी है. अभी कई मामलों में सामान्य पेनल्टी 25,000 रुपये तक पहुंच सकती है. प्रस्ताव में इसे घटाकर 10,000 रुपये करने पर विचार किया जा रहा है. साथ ही ऐसे मामलों के लिए भी अलग नियम बनाने की बात है, जहां कारोबारी से गलती हुई हो, लेकिन धोखाधड़ी, जानबूझकर गलत जानकारी देने या टैक्स चोरी की मंशा न हो. यानी हर गलती को एक ही नजर से देखने के बजाय मामले की प्रकृति के हिसाब से कार्रवाई का रास्ता बनाया जा सकता है.
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