हिंद महासागर से लेकर मलक्का स्ट्रेट तक तेजी से बदल रहे समीकरणों के बीच थाईलैंड ने अपनी हवाई निगरानी क्षमता में बड़ा अपग्रेड किया है. रॉयल थाई एयरफोर्स ने स्पेन की डिफेंस कंपनी इंद्रा से लैंजा 3डी (Lanza 3D Radar) लॉन्ग रेंज रडार खरीदने का फैसला किया है. इसे फुकेत एयर बेस पर तैनात किया जाएगा. फुकेत की लोकेशन इस डील को खास बनाती है, क्योंकि यह हिंद महासागर और मलक्का स्ट्रेट को जोड़ने वाले अहम समुद्री मार्ग के करीब है.
470 किलोमीटर दूर तक नजर रखने की क्षमता वाला यह रडार थाईलैंड के लिए सिर्फ एक नया निगरानी उपकरण नहीं, बल्कि उसके एयर डिफेंस नेटवर्क को मजबूत करने वाली अहम कड़ी है. इंद्रा के मुताबिक, लैंजा 3डी रडार ड्रोन, विमान, मिसाइल और दूसरे हवाई खतरों का पता लगाने की क्षमता रखता है. यानी आसमान में उड़ रही किसी संदिग्ध गतिविधि को काफी दूर से ही ट्रैक किया जा सकेगा.
470 KM दूर तक निगरानी
लैंजा-3D एल-बैंड रडार है, जो 1 से 2 GHz फ्रीक्वेंसी रेंज में काम करता है. कंपनी के मुताबिक इसकी अधिकतम इंस्ट्रूमेंटेड रेंज करीब 470 किलोमीटर है और यह 30480 मीटर तक की ऊंचाई पर मौजूद टारगेट्स का पता लगा सकता है. रडार 360 डिग्री कवरेज देता है और करीब 10 से 12 सेकेंड में एक स्कैन पूरा करता है.
इसकी खासियत छोटे और धीमी गति से उड़ने वाले ड्रोन को पकड़ने की क्षमता भी है. इसके अलावा यह स्टील्थ विमान, मिसाइल और दूसरे प्रोजेक्टाइल जैसे लक्ष्यों की निगरानी के लिए भी डिजाइन किया गया है.
फुकेत क्यों है इतना अहम?
फुकेत एयर बेस पर इस रडार की तैनाती की सबसे बड़ी वजह इसकी रणनीतिक लोकेशन है. यह इलाका हिंद महासागर और मलक्का स्ट्रेट के बीच आने-जाने वाले महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों के करीब है. मलक्का स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त रणनीतिक समुद्री रास्तों में शामिल है.
इस क्षेत्र में चीन की बढ़ती समुद्री और सैन्य सक्रियता के बीच दक्षिण-पूर्व एशियाई देश अपनी निगरानी और सुरक्षा क्षमताओं को लगातार मजबूत कर रहे हैं. हालांकि, थाईलैंड ने इस रडार खरीद को चीन के खिलाफ किसी खास कदम के तौर पर पेश नहीं किया है, लेकिन इसकी लोकेशन और लंबी दूरी की निगरानी क्षमता इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण बनाती है.
खराब मौसम और इलेक्ट्रॉनिक जाम में भी करेगा काम
समुद्री इलाके में ज्यादा नमी और खराब मौसम रडार सिस्टम के लिए चुनौती बन सकते हैं. इंद्रा का दावा है कि लैंजा 3डी को उच्च आर्द्रता और मुश्किल पर्यावरणीय परिस्थितियों में भी प्रभावी ढंग से काम करने के लिए डिजाइन किया गया है.
यह सिस्टम ऐसे इलेक्ट्रोमैग्नेटिक माहौल में भी काम करने में सक्षम है, जहां इंटरफेरेंस या इलेक्ट्रॉनिक व्यवधान मौजूद हो. मौजूदा दौर में जब ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर एयर डिफेंस के लिए बड़ी चुनौती बन चुके हैं, यह क्षमता काफी अहम मानी जाती है.
रडार के साथ मिलेगा कमांड सिस्टम
थाईलैंड को इस डील में सिर्फ रडार नहीं मिलेगा. इंद्रा अपना AirDef कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम भी उपलब्ध कराएगी. यह सिस्टम अलग-अलग खुफिया और निगरानी स्रोतों से मिले डेटा को एक जगह जोड़कर एयर डिफेंस के लिए साझा ऑपरेशनल तस्वीर तैयार करने में मदद करेगा.
नया लैंजा 3डी थाई एयरफोर्स द्वारा इंद्रा से खरीदा जाने वाला तीसरा ऐसा रडार है. इससे संकेत मिलता है कि बैंकॉक अपनी एयर सर्विलांस क्षमता को चरणबद्ध तरीके से बढ़ा रहा है.
थाईलैंड बढ़ा रहा रक्षा खर्च
थाईलैंड ने 2026 में रक्षा क्षेत्र के लिए करीब 6 अरब डॉलर का बजट रखा है. आने वाले वर्षों में भी उसके रक्षा खर्च और सैन्य खरीद में बढ़ोतरी का अनुमान है. इससे पहले मई में थाई एयरफोर्स ने सामरिक परिवहन के लिए दो और एयरबस सी295 (Airbus C295) विमानों का ऑर्डर दिया था.
ऐसे में लैंजा 3डी रडार की खरीद को थाईलैंड के व्यापक सैन्य आधुनिकीकरण कार्यक्रम की एक और कड़ी के तौर पर देखा जा सकता है. खासकर फुकेत जैसे रणनीतिक स्थान पर इसकी तैनाती से थाईलैंड को अपने हवाई क्षेत्र और आसपास के समुद्री इलाके में होने वाली गतिविधियों पर पहले से ज्यादा दूर तक नजर रखने की क्षमता मिलेगी.