Rajdhani Express: भारतीय रेलवे को अगर देश की लाइफलाइन कहा जाए तो राजधानी एक्सप्रेस इसका का सबसे चमचमाता सितारा है. आज भले ही वंदे भारत और शताब्दी जैसी मॉडर्न ट्रेन पटरियों पर दौड़ रही हों लेकिन प्रीमियम ट्रेनों की दुनिया में ‘राजधानी एक्सप्रेस’ का दबदबा आज भी कायम है. ट्रैक पर अपनी गड़गड़ाहट और लाल-पीले डिब्बों की पहचान से जानी जाने वाली यह ट्रेन भारतीय रेलवे के आधुनिक सफर की पहली गवाह बनी थी. राजधानी एक्सप्रेस का सफर कैसे शुरू हुआ, इसे यह नाम क्यों मिला और आखिर क्यों इसे ट्रेनों का राजा यानी King of Trains कहा जाता है?
राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन क्या है?
राजधानी एक्सप्रेस भारतीय रेलवे की तरफ चलाई जाने वाली एक सुपरफास्ट ट्रेन है जो ऑल एयर कंडीशंड ट्रेन सेवा है. 1960 के दशक तक भारत में ट्रेनों की रफ्तार काफी धीमी होती थी. देश के दूर-दराज के प्रमुख राज्यों और उनकी राजधानियों से देश की राजधानी नई दिल्ली तक पहुंचने में यात्रियों को दो से तीन दिन का लंबा वक्त लग जाता था.
1 मार्च 1969 को भारत की पहली राजधानी एक्सप्रेस नई दिल्ली से हावड़ा (कोलकाता) के बीच रवाना की गई थी. उस दौर में जब ट्रेनें अधिकतम 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती थीं, तब पहली राजधानी एक्सप्रेस ने 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़कर एक नया रिकॉर्ड बनाया था. इसने नई दिल्ली और हावड़ा के बीच की 1450 किलोमीटर की दूरी को महज 17 घंटे 20 मिनट में तय करके देश को हैरान कर दिया था.
इसका नाम ‘राजधानी’ ही क्यों पड़ा?
इस ट्रेन के नाम के पीछे एक बहुत ही सीधा और तार्किक कारण है. यह देश की अलग-अलग राजधानियों को जोड़ने वाली ट्रेन है. इस प्रीमियम ट्रेन सेवा को शुरू करने का मकसद अलग-अलग प्रदेशों की राजधानियों को देश की राजधानी नई दिल्ली से जोड़ना था.
राज्य की राजधानी से देश की राजधानी तक तेज, सुरक्षित और आरामदायक सफर मुहैया कराने के कारण ही इसका नाम ‘राजधानी एक्सप्रेस’ रखा गया. आज भारत के लगभग सभी प्रमुख राज्यों की राजधानियों जैसे मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु, चेन्नई, गुवाहाटी, पटना, अहमदाबाद से नई दिल्ली के लिए राजधानी एक्सप्रेस संचालित होती है.
राजधानी एक्सप्रेस की क्या-क्या खासियत हैं?
राजधानी एक्सप्रेस आम पैसेंजर ट्रेनों से कई मायनों में अलग और एडवांस है. इसकी कुछ मुख्य खासियत भी है. यह पूरी तरह एयर-कंडीशंड ट्रेन है. इस ट्रेन में सामान्य या स्लीपर कोच नहीं होते हैं. इसमें केवल First AC, 2-Tier AC और 3-Tier AC कोच ही शामिल होते हैं.
- कैटरिंग और ऑन-बोर्ड मील: राजधानी एक्सप्रेस में पेंट्री कार की बेहतरीन सुविधा होती है. टिकट के किराए में ही सूप, स्नैक्स, चाय, रात और दोपहर का खाना शामिल होता है. इसका खाना और सर्विस हाई-क्वालिटी की होती है.
- कम स्टॉपेज: यह ट्रेन केवल बड़े और अहम स्टेशनों पर ही रुकती है. अधिक ठहराव नहीं होने की वजह से यह समय की भारी बचत भी करती है.
- सुरक्षा और प्रायोरिटी: राजधानी एक्सप्रेस में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होते हैं. साथ ही रेलवे ट्रैक पर इसे अन्य सभी सामान्य ट्रेनों के मुकाबले में अधिक प्राथमिकता दी जाती है.
- आधुनिक LHB कोच: अब सभी राजधानी ट्रेनों को रेड-सिल्वर रंग वाले जर्मन टेक्नोलॉजी से बने LHB (Linke Hofmann Busch) डिब्बों में अपग्रेड कर दिया गया है. जो एंटी-टेलिस्कोपिक होते हैं यानी कि हादसे के वक्त एक डिब्बा दूसरे पर नहीं चढ़ता है.
राजधानी को ‘किंग ऑफ ट्रेन’ क्यों कहा जाता है?
भारतीय रेलमें राजधानी एक्सप्रेस को ‘किंग ऑफ द ट्रैक्स’ या ‘ट्रेनों का राजा’ का दर्जा हासिल है. इसके पीछे कई वजहें हैं.
- ट्रैक पर वीआईपी ट्रीटमेंट: भारतीय रेलवे के नियमों में राजधानी एक्सप्रेस को ‘रॉयल स्टेटस’ हासिल है. जब राजधानी पटरी पर दौड़ती है, तो मालगाड़ियों और अन्य पैसेंजर ट्रेनों को लूप लाइन में खड़ा करके इसे पहले रास्ता दिया जाता है.
- समय की पाबंदी: राजधानी एक्सप्रेस को सही समय पर डेस्टिनेशन तक पहुंचाने के लिए रेलवे कंट्रोल रूम लगातार मॉनिटरिंग करता है. देरी होने पर इसे प्राथमिकता से क्लियर कराया जाता है.
- लग्जरी और स्टेटस सिंबल: जब यह ट्रेन शुरू हुई थी, तब इसमें सफर करना एक स्टेटस सिंबल माना जाता था. बेहतरीन खाना, अटेंडेंट की सर्विस, साफ-सुथरा केबिन और आरामदायक सफर इसे अन्य ट्रेनों का ‘राजा’ बनाता है.
- स्पीड और क्रेडिबिलिटी: दशकों से भारत के एक कोने से दूसरे कोने तक सबसे तेज और सुरक्षित ट्रांसपोर्ट का भरोसा राजधानी एक्सप्रेस ने ही कायम रखा है.
भारत में भले ही आज हाई-स्पीड ट्रेनों का नया दौर शुरू हो चुका है, लेकिन भारतीय रेल के इतिहास और पटरियों पर ‘राजधानी एक्सप्रेस’ का जो रुतबा और शान रही है, उसने भारतीय रेल की पूरी दिशा और दशा बदल दी. यही वजह है कि इसे आज भी भारतीय पटरियों का बेताज बादशाह कहा जाता है.