छतरपुर की संस्था 40 सालों से संवार रही दिव्यांग बच्चों का भविष्य, दिव्यांग व्यक्ति ने की थी स्थापना

छतरपुर की संस्था 40 सालों से संवार रही दिव्यांग बच्चों का भविष्य, दिव्यांग व्यक्ति ने की थी स्थापना


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छतरपुर में एक दिव्यांग व्यक्ति द्वारा स्थापित संस्था 40 सालों से दिव्यांग बच्चों का भविष्य संवार रही है.यह संस्था निःशुल्क शिक्षा, भोजन और आवास प्रदान करती है, जिसमें वर्तमान में 32 बच्चे रहते हैं.

आज हम आपको एक ऐसी दिव्यांग संस्था की कहानी बताने जा रहे हैं जिसकी स्थापना एक दिव्यांग व्यक्ति ने की थी. आज इस संस्था को 40 साल हो चुके हैं. छतरपुर के निहाल अहमद सिद्दिकी जिन्होंने 26 मई 1986 में नि:शक्त आवासीय विद्यालय प्रगतिशील विकलांग संसार छतरपुर की शुरुआत की थी. हालांकि, उनके पास कोई पूंजी नहीं थी लेकिन लोगों से मदद करके इसे स्थापित किया. आज भी यहां 40 दिव्यांग बच्चों का भविष्य संवारा जा रहा है.

विकलांग व्यक्ति ने की शुरुआत
नि:शक्त आवासीय विद्यालय प्रगतिशील विकलांग संसार छतरपुर संस्थान के अध्यक्ष और पेशे से वकील संजय खरे बताते हैं कि छतरपुर निवासी निहाल अहमद सिद्दिकी ने 26 मई 1986 को इस दिव्यांग संस्था की शुरुआत की थी. उन्होंने कच्चे टिपार से दिव्यांग संस्था की शुरुआत की थी. इस संस्था को चलाने में भले ही आज सरकार मदद करने लगी है लेकिन उस समय हमारे समिति के पास न पैसा था और न ही सुविधाएं थीं. निहाल साब इस संस्था को चलाने के लिए शहर के बड़े-बड़े अधिकारियों, कर्मचारियों और नेताओं के घर-घर गए. सभी ने सहयोग भी किया.संजय बताते हैं कि निहाल साब उम्र में बड़े थे लेकिन हम मित्र की तरह रहते थे. कॉलेज के दौरान हम भी उनकी इस संस्था से जुड़ गए. उस दौरान यहां पहाड़ के नीचे टपार में ये दिव्यांग संस्था शुरू हुई थी.

विकलांग होने पर विचार आया
संजय बताते हैं कि इस संस्था को चलाने के लिए बहुत लोगों को जोड़ा गया.‌ ये संस्था खोलने का सपना निहाल सिद्दिकी साब का था. वह एक निडर व्यक्ति थे. उनकी छवि एक दबंग व्यक्ति की थी लेकिन वह मन के बहुत सच्चे थे. गरीब लोगों की मदद करते थे. हालांकि , दुर्भाग्यवश वह अपंग हो गए थे. यहीं से उनके मन में दिव्यांग बच्चों के लिए संस्था खोलने का विचार आया. घर से इतने सक्षम नहीं थे कि अपने दम से ही ये संस्था खोल लेते. इसलिए सभी लोगों से मदद मांगी और अपने विचार को जमीन में उतारा. उस समय लोगों को बुलाकर यहां उनके रुकने की व्यवस्था करते थे. दुर्भाग्य से वह आज हमारे बीच नहीं हैं. ये जिम्मेदारी आज उनका मित्र निभा रहा है.

40  दिव्यांग बच्चों के रहने की व्यवस्था
संजय बताते हैं कि यहां 40 बच्चों के रहने की व्यवस्था है. वर्तमान में 32 दिव्यांग बच्चे रहते हैं. जिसमें छोटे बच्चे से लेकर बड़े बच्चे शामिल हैं. यहां बच्चों का निःशुल्क रहना, खाना-पीना, पढ़ना सब फ्री रहता है. यहां 3 प्रोजेक्टर के साथ स्मार्ट क्लासरूम भी हैं. सुबह 8 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक बच्चों की पढ़ाई चलती है. स्कूल भी पढ़ने जाते हैं. साथ ही इस संस्था में स्टडी क्लास, मनोरंजन क्लास और म्यूजिक क्लास भी लगती है. शाम 6 बजे के बाद बच्चे फ्री हो जाते हैं.

सरकार ने किया सहयोग
संजय बताते हैं कि मप्र सरकार की तरफ से 1000 रुपए प्रति बच्चा और कर्मचारी भी सरकार ही देती है. वह बताते हैं कि जिला अस्पताल में डीडीआरसी संस्था भी इसी की है जहां दिव्यांग बच्चों के इस संस्था के बारे में भी जानकारी देते हैं.

दूर-दूर से आते बच्चे
संजय बताते हैं कि छतरपुर जिले के सटई, बड़ा मलहरा, राजनगर और 100‌किमी दूर गौरिहार जैसे क्षेत्रों से भी दिव्यांग बच्चे यहां आते हैं. इस संस्था में सभी जाति और धर्म के दिव्यांग बच्चों को प्रवेश देते हैं. ऐसे परिवार जिनके पढ़ाने और खाने के लिए पैसे नहीं हैं ऐसे बच्चों को हमारे यहां प्रवेश मिलता है. हम इसके लिए प्रचार-प्रसार भी करते हैं. हमारे यहां छोटे-छोटे मासूम दिव्यांग बच्चे गाते हैं, नाचते हैं, ड्राइंग बनाते हैं और स्मार्ट प्रोजेक्टर भी खुद चलाते हैं.



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