NEET 2026 Success Story: कुछ सपने ऐसे होते हैं जिनके लिए रास्ते में आने वाली मुश्किलें मंजिल से बड़ी नहीं होतीं.उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के देवकीपुर गांव के 19 साल के प्रभात कुमार यादव की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि पढ़ाई का खर्च आसानी से उठाया जा सके.पिता मुंबई में पिछले 20 साल से ऑटो चलाकर परिवार का खर्च संभाल रहे थे, लेकिन प्रभात ने अपनी परिस्थितियों को कमजोरी नहीं बनने दिया.प्रभात ने NEET UG 2026 में ऑल इंडिया रैंक 3864 (AIR 3864)हासिल की और अब उनका MBBS में दाखिला किंग जॉर्ज्स मेडिकल यूनिवर्सिटी यानी KGMU लखनऊ में हुआ है.खास बात यह है कि प्रभात के पास कोई बैकअप प्लान नहीं था. उनका पूरा फोकस सिर्फ NEET पर था. दो साल तक उन्होंने पढ़ाई, मॉक टेस्ट और सेल्फ स्टडी के बीच खुद को पूरी तरह इसी लक्ष्य के लिए तैयार किया.
पिता मुंबई में चलाते रहे ऑटो
प्रभात के पिता महेंद्र कुमार यादव पिछले करीब 20 साल से मुंबई में ऑटो-रिक्शा चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं. मुंबई जैसे बड़े शहर में दिनभर ऑटो चलाना आसान नहीं है. लंबे समय तक सड़कों पर रहने के बाद जब वह रात में अपने छोटे से चॉल वाले घर में लौटते थे तब भी बेटे की पढ़ाई और उसका सपना उनके लिए सबसे अहम रहता था.प्रभात बताते हैं कि उनके पिता कई बार रात में उन्हें वीडियो कॉल करते थे.वह अपने पिता को थका हुआ और पसीने से तर-बतर होकर खाना बनाते हुए देखते थे.पिता की मेहनत को करीब से देखकर प्रभात ने अपनी परिस्थितियों को लेकर शिकायत करने के बजाय उसे अपनी ताकत बनाने का फैसला किया.उनका कहना था कि कम से कम उन्हें पूरे दिन यात्रियों को ढूंढने के लिए सड़क पर नहीं घूमना पड़ता और दिनभर की मेहनत के बाद अपने लिए खाना भी नहीं बनाना पड़ता. उनके सामने सिर्फ एक काम था-पढ़ाई करना.पिता की मेहनत को देखकर यही सोच उन्हें लगातार आगे बढ़ाती रही.
पहले UPSC अफसर बनना चाहते थे प्रभात
प्रभात ने हमेशा से डॉक्टर बनने का सपना नहीं देखा था. उन्होंने बताया कि कक्षा 9 में उनका लक्ष्य UPSC की तैयारी करना और सिविल सर्विस में जाना था.मेडिकल क्षेत्र में जाने की उनकी कोई खास योजना नहीं थी लेकिन कक्षा 10 के बाद उनकी सोच बदल गई. उन्होंने 10वीं की बोर्ड परीक्षा 89.44 प्रतिशत अंकों के साथ पास की. इसके बाद परिवार ने उन्हें मेडिकल की पढ़ाई की तरफ जाने के लिए प्रेरित किया.प्रभात एक संयुक्त परिवार से आते हैं. उनका कहना है कि ऐसे परिवार में किसी बड़े फैसले के लिए सभी की राय और समर्थन जरूरी होता है. परिवार की सलाह के बाद उन्होंने मेडिकल को अपना लक्ष्य बनाया और धीरे-धीरे NEET ही उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा लक्ष्य बन गया.इसके बाद उन्होंने कक्षा 12 की पढ़ाई पूरी की और बोर्ड परीक्षा में 83.44 प्रतिशत अंक हासिल किए.
जौनपुर में पढ़ाई पूरी की, फिर कोटा में NEET की तैयारी
प्रभात ने अपनी 12वीं की पढ़ाई जौनपुर में पूरी की.उस समय उनके कई दोस्त 10वीं के बाद ही जौनपुर छोड़कर NEET की तैयारी के लिए कोटा जा चुके थे.प्रभात ने 12वीं पूरी करने के बाद उन्हीं की राह पकड़ने का फैसला किया.अपने लक्ष्य को लेकर वह पूरी तरह आश्वस्त थे.परिवार ने भी उनके फैसले पर भरोसा किया और उन्हें कोटा भेजने के लिए तैयार हो गया लेकिन यहां एक बड़ी चुनौती थी- कोचिंग की फीस.
फीस भरना मुश्किल था, कोचिंग से मांगी मदद
प्रभात के परिवार के लिए कोटा में कोचिंग और रहने का खर्च उठाना आसान नहीं था. उनके पिता की मासिक कमाई करीब 25 हजार से 30 हजार रुपये के बीच थी. इतनी आय में परिवार के दूसरे खर्चों के साथ बेटे की महंगी कोचिंग का खर्च उठाना बड़ी चुनौती थी.प्रभात ने हिम्मत नहीं छोड़ी.उन्होंने अपनी कोचिंग संस्था के वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर अपनी पारिवारिक और आर्थिक स्थिति के बारे में बताया और फीस में रियायत देने का अनुरोध किया.उनकी अपील स्वीकार कर ली गई.उन्हें कोचिंग फीस में 10 से 20 प्रतिशत की छूट मिली और बाकी राशि को फाइनेंस किया गया.कोटा में पढ़ाई और रहने के दूसरे खर्चों को संभालने में प्रभात के मामा ने भी परिवार की मदद की.इस तरह पिता और मामा ने मिलकर उनकी तैयारी का रास्ता आसान किया.
NEET UG 2025 में मिले 504 अंक
प्रभात ने NEET UG 2025 में पहली बार परीक्षा दी.इस प्रयास में उन्हें 504 अंक मिले. यह स्कोर उनके लिए पर्याप्त नहीं था कि वह अपने मनचाहे MBBS लक्ष्य तक पहुंच सकें.प्रभात के मुताबिक उस समय वह प्रतियोगिता के माहौल के साथ खुद को ढाल रहे थे और थोड़े रिलैक्स भी थे.उनके स्कोर के आधार पर उन्हें BDS, BUMS जैसे दूसरे मेडिकल कोर्स में दाखिला मिल सकता था लेकिन प्रभात को अपनी गलतियों और कमजोरियों का अंदाजा हो चुका था.उन्होंने तय किया कि वह दोबारा तैयारी करेंगे और सिर्फ MBBS के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ेंगे.उनके कई शिक्षकों ने भी परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उन्हें उपलब्ध दूसरे कोर्स में दाखिला लेने की सलाह दी लेकिन प्रभात अपने फैसले पर कायम रहे. उन्होंने MBBS के अलावा किसी दूसरे विकल्प को अपना लक्ष्य नहीं बनाया.
न Instagram, न YouTube, पढ़ाई ही सबसे बड़ा फोकस
आज के दौर में 19 साल की उम्र में सोशल मीडिया से दूर रहना आसान नहीं है लेकिन प्रभात ने अपनी NEET तैयारी के दौरान लगभग जीरो स्क्रीन टाइम रखा.उन्होंने Instagram और YouTube से दूरी बनाए रखी.उनका ज्यादातर समय किताबों, क्लास, मॉक टेस्ट और सेल्फ स्टडी में बीतता था.कोचिंग में कभी-कभी वह फिल्मी गाने गाकर अपना मूड हल्का कर लेते थे लेकिन इसके अलावा उन्होंने खुद को किसी दूसरी चीज में उलझने नहीं दिया.कभी-कभी वह अपने हॉस्टल के पास मंदिर चले जाते थे या साथी हॉस्टलर्स के साथ बैठकर थोड़ा समय बिताते थे लेकिन दिन का बाकी हिस्सा पढ़ाई के नाम रहता था.उनकी दिनचर्या में कोचिंग क्लास, मॉक टेस्ट और लंबे समय तक सेल्फ स्टडी शामिल थी. दो साल तक इसी तरह उन्होंने खुद को NEET के लिए तैयार किया.
NEET पेपर लीक की खबर ने किया परेशान
NEET परीक्षा को लेकर पेपर लीक की खबरों ने प्रभात को भी परेशान किया.उन्हें दोबारा परीक्षा देने का विचार भारी लग रहा था हालांकि उन्होंने इसे अपने लिए एक और मौके के रूप में देखा.उनका मानना था कि दोबारा परीक्षा देने से वह अपने अंक सुधार सकते हैं.इसी सोच के साथ उन्होंने दोबारा तैयारी जारी रखी.
दो साल की मेहनत के बाद पास की NEET
आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई.NEET UG 2026 के नतीजे 16 जुलाई को जारी हुए और प्रभात ने इस बार ऑल इंडिया रैंक 3864 हासिल की.इस रैंक के साथ उन्हें उत्तर प्रदेश की प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज्स मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU)लखनऊ में MBBS सीट मिल गई.जिस छात्र ने एक साल पहले 504 अंक हासिल किए थे उसने अगले प्रयास में अपनी कमजोरियों पर काम किया और MBBS तक पहुंचने का रास्ता बना लिया.
देवकीपुर में छा गई खुशी
जब 16 जुलाई को NEET UG 2026 का रिजल्ट आया तो प्रभात के जौनपुर स्थित देवकीपुर गांव में खुशी की लहर दौड़ गई.पड़ोसियों और रिश्तेदारों ने उन्हें बधाई दी.सैकड़ों किलोमीटर दूर मुंबई में उनके पिता के लिए यह खबर राहत लेकर आई.जिस पिता ने पिछले 20 साल से ऑटो चलाकर परिवार को संभाला और बेटे की पढ़ाई के लिए हर महीने की कमाई से पैसे जोड़े उसके लिए बेटे का मेडिकल कॉलेज में पहुंचना बड़ी उपलब्धि थी.प्रभात की कहानी को कई जगह ऑटो ड्राइवर के बेटे ने NEET पास किया जैसी सुर्खियों के साथ जगह मिली हालांकि प्रभात और उनके परिवार के लिए NEET में सफलता के बाद भी आर्थिक संघर्ष खत्म नहीं हुआ.
50 हजार जुटाना भी चुनौती
NEET में अच्छी रैंक और KGMU में MBBS सीट मिलने के बाद परिवार के सामने अगली चुनौती एडमिशन फीस की थी.प्रभात ने बताया कि KGMU में एडमिशन फीस के लिए 50 हजार रुपये जुटाना भी उनके परिवार के लिए आसान नहीं था हालांकि उनके पिता और मामा ने किसी तरह इस रकम का इंतजाम किया और उनका दाखिला कराया.प्रभात का मानना है कि MBBS सीट हासिल करना सारी परेशानियों का अंत नहीं है बल्कि यह उनके लिए बेहतर दिनों की शुरुआत है. मेडिकल कॉलेज तक पहुंचना उनके सपने का एक अहम पड़ाव है लेकिन आगे अभी लंबा सफर तय करना बाकी है.
पिता को वापस गांव लाना चाहते हैं
अब जब प्रभात मेडिकल कॉलेज पहुंच चुके हैं तो उनके मन में अपने पिता को लेकर एक बड़ा सपना है.उनकी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर अपने पिता महेंद्र कुमार यादव को मुंबई से वापस उनके गृह क्षेत्र में लाना है.पिता ने दो दशक तक मुंबई में ऑटो चलाकर परिवार की जिम्मेदारियां संभाली हैं. प्रभात चाहते हैं कि आगे चलकर उनके पिता को इतनी मेहनत न करनी पड़े और वह अपने घर-गांव में उनके साथ रहें.
छात्रों की मदद करना चाहते हैं
प्रभात का सपना सिर्फ डॉक्टर बनने तक सीमित नहीं है.वह भविष्य में उन छात्रों की मदद करना चाहते हैं जो उनकी तरह आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं और पढ़ाई के जरिए आगे बढ़ना चाहते हैं.उनका मानना है कि अगर परिवार, गांव के लोगों और दूसरे लोगों का सहयोग किसी छात्र को आगे बढ़ाता है तो उस मदद को आगे किसी और जरूरतमंद तक पहुंचाना भी जरूरी है.प्रभात कहते हैं कि उन्होंने जो कुछ हासिल किया है वह परिवार और गांव के लोगों के भरोसे और सहयोग के बिना संभव नहीं होता. उनका मानना है कि अच्छे काम सिर्फ एक तरफ से नहीं होने चाहिए, बल्कि उनका जवाब बराबर या उससे भी ज्यादा अच्छे तरीके से दिया जाना चाहिए.
नई जिंदगी के लिए तैयार हैं प्रभात
दो साल की कड़ी मेहनत, परिवार के त्याग और NEET पर एकाग्र होकर तैयारी करने के बाद प्रभात अब अपनी जिंदगी के अगले अध्याय की ओर बढ़ रहे हैं. KGMU में MBBS की पढ़ाई उनके लिए उस सपने की शुरुआत है जिसके लिए उनके पिता ने मुंबई की सड़कों पर दो दशक तक ऑटो चलाया.NEET की तैयारी के दौरान किताबों और मॉक टेस्ट तक सीमित रहने वाले प्रभात अब अपनी कहानी सोशल मीडिया और YouTube पर भी साझा करने लगे हैं. मेडिकल कॉलेज में पहला कदम रखने से पहले वह अपनी तैयारी, संघर्ष और सफलता का अनुभव दूसरे छात्रों तक पहुंचा रहे हैं.उनकी कहानी में सबसे खास बात सिर्फ AIR 3864 या KGMU में MBBS सीट हासिल करना नहीं है. इसके पीछे एक ऐसे पिता की मेहनत है, जिसने अपनी सीमित कमाई के बावजूद बेटे के सपने पर भरोसा किया और एक ऐसे बेटे का संकल्प है, जिसने परिवार की आर्थिक परेशानियों को अपनी पढ़ाई के रास्ते की दीवार नहीं बनने दिया.