कॉलेज में 4 CGPA, NDA में हुए कई बार फेल और SSB में भी मिली हार, फिर आई एक आवाज – Chest नंबर 29 यू आर सेलेक्टेड

कॉलेज में 4 CGPA, NDA में हुए कई बार फेल और SSB में भी मिली हार, फिर आई एक आवाज – Chest नंबर 29 यू आर सेलेक्टेड


Keerat Singh CDS Success Story: आज की यह कहानी सिर्फ NDA या CDS पास करने की नहीं है, बल्कि बार-बार अलग-अलग परीक्षाओं में असफल होने के बाद भी अपने लक्ष्य पर डटे रहने की है. दरअसल, आज हम एक ऐसे छात्र के बारे में आपको बताएंगे, जिसने NDA की लिखित परीक्षा में दो बार असफलता देखी, SSB में भी लगातार हार मिली. इसके अलावा कॉलेज में बेहद कम CGPA आया और एक समय पढ़ाई में बैक तक लग गई. लेकिन उसने आखिर तक हार नहीं मानी और फिर उसी छात्र ने अपनी कमियों पर काम किया, CDS परीक्षा पास की और आखिरकार SSB में वह नाम सुन लिया जिसका उसे कई सालों से इंतजार था.

17 साल की उम्र में देखा था भारतीय सेना में जाने का सपना

दरअसल, हम बात कर रहे हैं कीरत सिंह (Keerat Singh) की, जिन्होंने स्कूल के दिनों में ही भारतीय सेना में शामिल होने का सपना था. इसलिए 17 साल की उम्र में ही उन्होंने NDA की लिखित परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी. हालांकि, पढ़ाई में वह खुद को बहुत तेज छात्र नहीं मानते थे इसलिए शुरुआत आसान नहीं रही. पहली कोशिश में NDA की परीक्षा पास नहीं हुई और दूसरी कोशिश में भी निराशा ही हाथ लगी. लगातार दो असफलताओं के बाद उनके मन में यह सवाल आने लगा कि क्या वह सच में सेना के लिए बने हैं या नहीं.

दोस्त से मिलने पहुंचे NDA, साथ ही क्लियर हो गया एग्जाम

इसी बीच बोर्ड परीक्षा खत्म हुई और उन्होंने कॉलेज में एडमिशन के लिए कई कॉम्पिटिटिव एग्जाम दिए. उन्हें Symbiosis Institute of Management Studies में एडमिशन मिला. इसके बाद वह पुणे पहुंचे और अपने दोस्त अयान से मिलने NDA गए. वहां का माहौल, यूनिफॉर्म में कैडेट और कैंपस की इमारतों ने उनके पुराने सपने को और मजबूत कर दिया. इसी दौरान उन्हें खबर मिली कि उन्होंने तीसरी कोशिश में NDA की लिखित परीक्षा पास कर ली है.

NDA के बाद SSB में मिली लगातार निराशा

NDA लिखित परीक्षा पास करने के बाद उन्हें SSB इलाहाबाद बुलाया गया. वह अपनी पहली SSB को लेकर काफी उत्साहित और थोड़े नर्वस भी थे. उन्होंने तैयारी पूरी मेहनत से की, लेकिन सेलेक्शन नहीं हो सका. वह कॉन्फ्रेंस से बाहर हो गए. उन्हें लगा कि कुछ जगहों पर उनसे गलतियां हुईं और वह बेहतर प्रदर्शन कर सकते थे.

Symbiosis छोड़ पहुंचे दिल्ली यूनिवर्सिटी

हालांकि, यह उनके लिए बड़ा झटका था. पहली बार उन्हें लगा कि शायद अब उन्हें अपना सपना छोड़ देना चाहिए. लेकिन उन्होंने खुद को संभाला और तय किया कि कुछ साल की मेहनत आगे की पूरी जिंदगी बदल सकती है. इसी दौरान उन्हें दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज (Hindu College, Delhi University) में B.Sc. (Hons.) Mathematics में भी एडमिशन मिल गया.

कॉलेज में हालात और भी मुश्किल हो गए

अब उनके सामने दो बड़ी जिम्मेदारियां थीं. एक तरफ कॉलेज की पढ़ाई थी और दूसरी तरफ NDA की तैयारी. दोनों को साथ संभालना आसान नहीं था. पहले सेमेस्टर में उनका प्रदर्शन इतना खराब रहा कि उन्हें सिर्फ 5 CGPA मिला. इसके बाद भी उन्होंने NDA की चौथी और आखिरी कोशिश की तैयारी शुरू कर दी.

NDA की आखिरी कोशिश में भी हुए फेल, Calculus में आई बैक

उन्होंने लिखित परीक्षा फिर पास कर ली और इस बार SSB जालंधर में बुलावा आया. उन्हें लगा कि इस बार पिछली गलती नहीं दोहराएंगे. लेकिन परिणाम फिर उनके पक्ष में नहीं आया. वह दोबारा कॉन्फ्रेंस से बाहर हो गए. वहीं, उनके ग्रुप के कई उम्मीदवारों का सेलेक्शन हो गया, लेकिन उनका नाम नहीं आया. यह असफलता उनके लिए बेहद दर्दनाक थी. घर लौटने के बाद वह काफी समय तक किसी से बात तक नहीं करना चाहते थे. कॉलेज में भी हालात खराब रहे और उनकी Calculus में बैक लग गई. उनका CGPA 4 से कुछ ऊपर रहा, जो उनकी क्लास में सबसे कम था.

एक छोटे से की-चेन ने फिर याद दिलाया लक्ष्य

ऐसे समय में उन्हें अपने दोस्त अयान की दी हुई NDA की एक की-चेन मिली. उस छोटी सी चीज ने उन्हें फिर से उनके पुराने लक्ष्य की याद दिला दी. उन्हें एहसास हुआ कि मुश्किल आने पर रुक जाना उनके सपने का रास्ता नहीं हो सकता. उन्होंने तय किया कि अब वह अपनी जिंदगी के हर हिस्से को बेहतर बनाने पर ध्यान देंगे.

घर छोड़कर PG में रहने का लिया फैसला

वह कॉलेज के पास PG में रहने लगे और पहली बार घर और माता-पिता से दूर रहकर खुद अपनी जिम्मेदारियां संभालने लगे. CDS परीक्षा में अभी करीब एक साल था, इसलिए उन्होंने अपनी कॉलेज की पढ़ाई सुधारने का फैसला किया. उन्होंने कॉलेज की सोसायटी और डिपार्टमेंटल एक्टिविटीज में हिस्सा लिया, खेलों में शामिल हुए और पढ़ाई पर ज्यादा मेहनत शुरू कर दी.

4 CGPA से 7.73 तक पहुंचाया स्कोर

जिस छात्र का CGPA कुछ समय पहले 4 के आसपास था, उसने अगले सेमेस्टर में जबरदस्त सुधार किया. तीसरे सेमेस्टर में उनका CGPA बढ़कर 7.73 हो गया. इसके बाद चौथे सेमेस्टर में उन्होंने 7.82 CGPA हासिल किया और Calculus की पुरानी बैक भी क्लियर कर ली.

करियर में होना चाहिए एक बैकअप प्लान

इसी दौरान उन्होंने यह भी समझा कि करियर में एक बैकअप प्लान होना जरूरी है. उन्होंने सीनियर्स से बात करके डिग्री के बाद मिलने वाले करियर विकल्पों, प्लेसमेंट और इंटर्नशिप के बारे में जानकारी जुटाई. इससे पहले उनका पूरा ध्यान सिर्फ सेना में जाने पर था, इसलिए यह उनके लिए बिल्कुल नया अनुभव था.

रोज 10 घंटे पढ़ाई, फिर CDS में मिली सफलता

जून के आखिर से उन्होंने CDS की लिखित परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी. उनके पिता उस समय शिमला में पोस्टेड थे, इसलिए वह उनके पास चले गए. वहां उन्होंने करीब 10 घंटे रोज पढ़ाई की. सितंबर में उन्होंने CDS की परीक्षा दी और पहली ही कोशिश में Officers Training Academy, Chennai के लिए लिखित परीक्षा पास कर ली.

NDA की पिछली कोशिशों से मिली सीख ने भी उनकी तैयारी में मदद की. इस बार उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई को नजरअंदाज नहीं किया और साथ-साथ SSB की तैयारी भी करते रहे. उन्होंने कॉलेज की परीक्षा दी और 7.6 CGPA हासिल किया. पांचवें सेमेस्टर में उन्होंने प्लेसमेंट में भी हिस्सा लिया और दो ऑफर हासिल किए – एक Junior Project Manager और दूसरा Entrepreneur in Residence का.

SSB भोपाल में था आखिरी बड़ा पड़ाव

CDS के बाद उन्हें SSB भोपाल के लिए बुलाया गया. जब वह वहां पहुंचे तो उनकी उम्र सिर्फ 20 साल थी और वह अपने बैच में सबसे कम उम्र के उम्मीदवार थे. बाकी उम्मीदवारों की उम्र लगभग 22 से 25 साल के बीच थी. रिपोर्टिंग के समय वह काफी नर्वस थे, लेकिन उन्होंने खुद को संभाला और अपने लक्ष्य पर ध्यान रखा.

पहले दिन स्क्रीनिंग टेस्ट (Screening Test) हुआ और वह उसमें सफल रहे. करीब 32 उम्मीदवारों को स्क्रीन इन किया गया और उन्हें Chest Number 29 मिला. इसके बाद Psychology Tests, Interview और GTO Tasks हुए. उन्हें लगा कि पिछली कोशिशों की तुलना में इस बार उन्होंने बेहतर प्रदर्शन किया है. इंटरव्यू उन्हें बहुत अच्छा नहीं लगा, लेकिन उन्होंने ईमानदारी से खुद को सामने रखा और किसी तरह की बनावटी छवि पेश करने की कोशिश नहीं की.

दो मिनट की कॉन्फ्रेंस और फिर आया जिंदगी का सबसे बड़ा पल

कॉन्फ्रेंस वाले दिन उनकी कॉन्फ्रेंस सिर्फ दो मिनट चली. उन्हें लगा कि शायद इस बार भी उनका सेलेक्शन नहीं होगा. कमरे में सभी उम्मीदवार रिजल्ट का इंतजार कर रहे थे और माहौल काफी शांत था. इसके बाद साइकोलॉजी ऑफिसर ने चयनित उम्मीदवारों के Chest Number बोलना शुरू किया. पहले तीन उम्मीदवारों के नंबर बताए गए. इसके बाद उन्होंने कहा कि एक और उम्मीदवार है. फिर आवाज आई – Chest Number 29.

दूसरी बार नाम पुकारने पर हुआ यकीन

पहली बार उन्हें यकीन ही नहीं हुआ कि यह उनका नंबर है. दोबारा उनका नाम पुकारा गया. तब उन्हें समझ आया कि आखिरकार उनका सेलेक्शन हो गया है. वह इतनी तेजी से अपनी सीट से उठे कि सामने रखी टेबल तक टूट गई. इसके बाद वह बाकी चयनित उम्मीदवारों के साथ जाकर खड़े हो गए.

वर्षों की असफलता के बाद आंखों में आए आंसू

सेलेक्शन के उस पल को वह ठीक से महसूस भी नहीं कर पा रहे थे. उनके लिए यह किसी सपने जैसा था. आंखों से आंसू निकल आए, लेकिन वह खुशी से ज्यादा राहत का पल था. उन्हें उन सभी रातों की याद आई जब वह देर तक पढ़ते रहे थे. उन्हें NDA की असफल कोशिशें, SSB में मिली निराशा, खराब CGPA और वे दिन याद आए जब उन्होंने खुद से सवाल किया था कि क्या वह कभी अपने लक्ष्य तक पहुंच पाएंगे.

उन्होंने अपने माता-पिता, परिवार, दोस्तों और उस समय उनके साथ खड़े लोगों को याद किया. उनकी तैयारी के दौरान उनका पालतू कुत्ता Leo भी अक्सर उनके पास बैठा रहता था. उनके लिए यह सफलता सिर्फ एक परीक्षा पास करने का नतीजा नहीं थी, बल्कि लंबे समय तक चले संघर्ष का जवाब थी.

मेडिकल टेस्ट भी किया क्लियर, 7.73 CGPA के साथ पूरी की ग्रेजुएशन

SSB में सेलेक्शन के बाद उन्होंने मेडिकल परीक्षा भी पास कर ली और दिल्ली लौट आए. इसके बाद उन्होंने अपनी फाइनल सेमेस्टर की पढ़ाई पूरी की और 7.73 CGPA के साथ हिंदू कॉलेज से ग्रेजुएशन पूरी की. जिस सफर की शुरुआत बेहद कम आत्मविश्वास और लगातार असफलताओं से हुई थी, उसका अंत एक ऐसे मुकाम पर हुआ जहां उन्होंने अपने सेना में जाने के सपने को पूरा कर लिया.

उनकी कहानी का सबसे बड़ा सबक यही है कि किसी परीक्षा में असफल होना हमेशा सपने का अंत नहीं होता. कभी-कभी असफलता यह बताती है कि तैयारी के किस हिस्से में बदलाव की जरूरत है. NDA में बार-बार मिली असफलता, SSB में दो बार बाहर होना और कॉलेज में खराब प्रदर्शन – इन सबके बावजूद उन्होंने अपनी कमियों पर काम करना जारी रखा. उनकी यात्रा बताती है कि लक्ष्य के रास्ते में गिरना और फिर दोबारा खड़े होकर आगे बढ़ना भी सफलता की कहानी का हिस्सा हो सकता है.



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