जम्मू से गयाजी पहुंचे बुजुर्ग माता-पिता, 8 साल बाद शहीद बेटे का किया पिंडदान; दुपट्टे से आंसू छिपाती रही मां।Gaya Pitru Paksha Mela

जम्मू से गयाजी पहुंचे बुजुर्ग माता-पिता, 8 साल बाद शहीद बेटे का किया पिंडदान; दुपट्टे से आंसू छिपाती रही मां।Gaya Pitru Paksha Mela


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जम्मू से गयाजी पहुंचे बुजुर्ग माता-पिता, 8 साल बाद शहीद बेटे का किया पिंडदान

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Gayaji Pitru Paksha Mela 2026: गया में पितृपक्ष मेले के दौरान, जम्मू-कश्मीर के 80 वर्षीय करतार सिंह और विमला देवी ने अपने 25 वर्षीय फौजी बेटे पर्थ सिंह का पिंडदान किया, जिसकी 8 साल पहले एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी. मां विमला देवी अपने आंसू छिपाने के लिए दुपट्टे से चेहरा ढक रही थीं.

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गया: बिहार के गया में इन दिनों पितृपक्ष मेला चल रहा है. देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु यहां पहुंचकर अपने पूर्वजों का पिंडदान कर रहे हैं. इसी बीच प्रेतशिला पहाड़ी के नीचे एक भावुक कर देने वाला दृश्य देखने को मिला. जहां जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले के ब्रीकमिला गांव से आए 80 वर्षीय करतार सिंह और उनकी पत्नी विमला देवी ने अपने दिवंगत बेटे पर्थ सिंह का पिंडदान किया. पिंडदान के दौरान दोनों बुजुर्ग माता-पिता के हाथों में अपने बेटे की तस्वीर थी. बेटे को याद करते हुए दोनों भावुक हो गए. मां विमला देवी की आंखों से लगातार आंसू बह रहे थे. वह अपने आंसुओं को छिपाने के लिए दुपट्टे से चेहरा ढकती नजर आईं. किसी तरह खुद को संभालते हुए दोनों ने प्रेतशिला पिंडवेदी पर बेटे का पिंडदान पूरा किया.

25 साल की उम्र में हादसे में चली गई जान
परिवार के मुताबिक करीब आठ साल पहले ड्यूटी के दौरान हुए एक सड़क हादसे में चार जवानों की मौत हो गई थी. इनमें पर्थ सिंह भी शामिल थे. बताया गया कि पर्थ सिंह अपने साथियों के साथ ट्रेनिंग के लिए पंजाब से जम्मू-कश्मीर जा रहे थे. इसी दौरान रास्ते में जवानों की गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई. उस हादसे में उनकी मौत हो गई. उस समय पर्थ सिंह की उम्र करीब 25 वर्ष थी. बेटे की अचानक हुई मौत ने पूरे परिवार को झकझोर दिया था. करीब आठ साल बाद उनके बुजुर्ग माता-पिता गया पहुंचे. अपने बेटे की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया.

बेटे की तस्वीर हाथ में लेकर किया पिंडदान
पिंडदान के दौरान करतार सिंह और विमला देवी लगातार अपने बेटे की तस्वीर को देखते रहे. परिवार के साथ आए मंगल सिंह ने बताया कि पर्थ सिंह की याद आज भी परिवार को आती है. उन्होंने कहा कि जिस दिन हादसे में पर्थ सिंह और अन्य जवानों की मौत हुई. उस दिन को परिवार कभी नहीं भूल सकता. करतार सिंह के एक और बेटे हैं. वे गांव में रहकर खेती-किसानी करते हैं. अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल करते हैं.

प्रेतशिला में किया जाता है पिंडदान
गया की प्रेतशिला पहाड़ी पर अकाल या आकस्मिक मृत्यु को प्राप्त पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान की परंपरा है. पितृपक्ष के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. प्रेतशिला पहाड़ी तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब 676 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं. पहाड़ी के नीचे स्थित ब्रह्मकुंड के पास भी पिंडदान किया जाता है. पितृपक्ष के दौरान यहां दूर-दूर से आए श्रद्धालु अपने दिवंगत परिजनों को श्रद्धापूर्वक याद करते नजर आते हैं.



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