चीन के अमीर लोगों में क्यों मचा है हाहाकार? ड्रैगन किसलिए विदेशी प्रॉपर्टी पर चला रहा चाबुक

चीन के अमीर लोगों में क्यों मचा है हाहाकार? ड्रैगन किसलिए विदेशी प्रॉपर्टी पर चला रहा चाबुक


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चीन के अमीर क्यों परेशान? ड्रैगन किसलिए विदेशी प्रॉपर्टी पर चला रहा चाबुक

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देश में बढ़ते वित्तीय संकट और गिरते राजस्व से निपटने के लिए चीनी अधिकारियों ने अब अरबपतियों की ऑफशोर वेल्थ यानी कि विदेशों में रखी संपत्ति और विदेशी निवेश पर टैक्स की जांच तेज कर दी है. ड्रैगन की तरफ से अपने ही देश के नागरिकों पर चाबुक चलाया जा रहा है. आखिर यह ऐक्शन क्यों लिया जा रहा है?

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चीन की खबर

Chinese Billionaires and Offshore Wealth: चीन की खबरें अक्सर चौंका देती हैं. इस समय वहां के अमीर लोगों में अजीब सी बेचैनी और घबराहट है. ऐसा इसलिए कि चीन की शी जिनपिंग सरकार देश के अमीर उद्योगपतियों और अरबपतियों पर अपनी नकेल कसती जा रही है. अब सवाल है कि इसकी वजह क्या है? तो देश में बढ़ते वित्तीय संकट और लगातार गिरते राजस्व से निपटने के लिए चीनी अधिकारियों ने अब इन अरबपतियों की लिस्ट बनाकर ऑफशोर वेल्थ यानी कि विदेशों में रखी संपत्ति और विदेशी निवेश पर टैक्स की जांच तेज कर दी है. ड्रैगन की तरफ से अपने ही देश के नागरिकों पर चाबुक चलाया जा रहा है. समझते हैं कि आखिर यह ऐक्शन क्यों लिया जा रहा है?

क्या है ये पूरा मामला?
चीन में रियल एस्टेट संकट की वजह से स्थानीय सरकारों के राजस्व में भारी गिरावट आई है. इस राजकोषीय घाटे यानी फिस्कल डेफिसिट की भरपाई के लिए चीन के टैक्स अधिकारियों ने ‘कॉमन रिपोर्टिंग स्टैंडर्ड’ का सहारा लेकर चाइनीज टैक्स पेयर्स की विदेशी बैंक संपत्तियों, ऑफशोर ट्रस्ट और विदेशी इनकम की निगरानी शुरू कर दी है.

टैक्सेशन के नियमों के तहत अगर चीन का कोई नागरिक विदेशी ट्रस्ट या विदेश में संपत्ति ट्रांसफर करता है, तो उस पर 20 प्रतिशत टैक्स लागू होता है. इसके अलावा विदेश से होने वाली कमाई पर भी भारी टैक्स की मांग की जा रही है. चाइनीज सरकार के इस कदम की वजह से अमीर लोगों में बेचैनी बढ़ रही है.

टैक्स क्रैकडाउन क्यों?

  1. 90 दिनों की अंतिम मोहलत: चाइनीज अधिकारियों ने प्रभावित अरबपतियों और इंडस्ट्रियलिस्ट्स को अपनी ऑफशोर प्रॉपर्टी का खुलासा करने और बकाया टैक्स चुकाने के लिए 90 दिनों की समयसीमा दी है.
  2. 20 फीसदी टैक्स की दर: विदेश में ट्रांसफर की गई पूंजी, शेयर और प्रॉपर्टी पर मिले हुए लाभ पर 20 फीसदी टैक्स देने का प्रोविजन है.
  3. नकदी की किल्लत: कई अरबपतियों की संपत्ति रियल एस्टेट या शेयरों में फंसी हुई है, जिससे अचानक आया यह टैक्स बिल चुकाने के लिए उनके पास पर्याप्त कैश नहीं है. इसके चलते कई बड़े इनवेस्टर अपने शेयर बेचने या कर्ज लेने पर मजबूर हो रहे हैं.

हॉन्ग कॉन्ग और ग्लोबल मार्केट पर असर
चीन के इस कदम से हॉन्ग कॉन्ग के फाइनैंशियल सेंटर में हड़कंप मच गया है. चीन के धनकुबेर पिछले कई सालों से टैक्स से बचने और संपत्तियों को सुरक्षित रखने के लिए हॉन्ग कॉन्ग के ऑफशोर ट्रस्ट्स का इस्तेमाल करते आए हैं. अब टैक्स विभाग की तरफ से कड़ाई किए जाने के बाद सिंगापुर जैसे देशों की ओर संपत्तियों को ट्रांसफर करने की होड़ मच गई है.

अब इस मामले में एक्सपर्ट्स का ऐसा मानना है कि यह कार्रवाई केवल टैक्स वसूलने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि चीन सरकार अपनी ‘कॉमन प्रॉस्पेरिटी’ पॉलिसी के तहत प्राइवेट कैपिटल यानी निजी पूंजी पर पूरा का पूरा कंट्रोल हासिल कर लेना चाहती है. इसका असर क्या होगा, यह तो आने वाले समय में पता चलेगा.



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