द्वारका के बाद अब पूम्पुहार… भारत के कितने प्राचीन शहर समुद्र में समा चुके?
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तमिलनाडु के पास पुरातत्व विभाग के अधिकारियों को चोल साम्राज्य के शहर पूम्पुहार से जुड़े साक्ष्य मिले हैं. यह भारत के उन गिने-चुने शहरों में शामिल है जो समुद्र के आगोश में समा चुके हैं. इस लिस्ट में गुजरात, तमिलनाडु के अलावा केरल का भी एक शहर शामिल है.
समुद्र के अंदर खोजबीन करती ASI की टीम ( फाइल फोटो-ASI)
समुद्र के नीचे सिर्फ रेत और चट्टानें नहीं बल्कि सभयताओं का इतिहास भी होता है. अब तक भारत के समुद्री तटों के पास पानी के अंदर कई ऐसे साक्ष्य मिले हैं जो ये साबित करते हैं कि यहां कभी बंदरगाह, बस्तियां और आबाद शहर रहे होंगे. हाल ही तमिलनाडु के तट से दो किमी दूर समुद्र में पूम्पुहार शहर और उससे जुड़े साक्ष्य मिले हैं. तमिलनाडु पुरातत्व विभाग के मुताबिक ऐसा हो सकता है कि सुनामी की वजह से ये शहर समुद्र में डूब गया हो. हालांकि समुद्र में डूबने वाला यह अकेला शहर नहीं है. इससे पहले गुजरात के द्वारका, कर्नाटक का महाबलीपुरम समेत अन्य शहरों के समुद्र में डूबने के साक्ष्य मिल चुके हैं.
तमिलनाडु का पुरातत्व विभाग इन दिनों पूम्पुहार शहर की खोज में जुटा हुआ है. कभी कावेरी नदी से बिल्कुल सटा ये शहर अब समुद्र के अंदर समा चुका है. हाल ही में पुरातत्व विभाग की टीम ने यहां से 200 से ज्यादा मिट्टी के बर्तनों के टुकड़े, टेराकोटा रिंग वेल और टॉरपीडो जार खोजे थे. जहां ये साक्ष्य मिले हैं वह समुद्री तट रेखा से तकरीबन दो किलोमीटर अंदर है. पुरातत्व विभाग के मुताबिक इसे कभी कावेरीपूम्पट्रटिनम भी कहा जाता था. जो चोल साम्राज्य का प्रमुख बंदरगाह हुआ करता था. पहले यहां जमीन की खोदाई ने घाट जैसी संरचना मिली थी, अब समुद्र के अंदर मिले साक्ष्यों ने खोज के दायरे को और बढ़ा दिया है.
भारत के कौन-कौन से शहर समुद्र में डूबे?
द्वारका : गुजरात के सौराष्ट्र तट पर द्वारका भारत का सबसे प्राचीन ऐसा शहर माना जाता है तो समुद्र में डूब चुका है. धार्मिक ग्रंथों में भी द्वारका के समुद्र में समा जाने का वर्णन मिलता है. पुरातत्व विभाग भी यहां कई ऐसे पुरातात्विक अवशेष खोज चुका है, जिससे इस शहर के भव्य और समृद्ध होने के साक्ष्य मिले हैं. 1980 के दशक में समुद्री पुरातत्वविद् एस. आर. राव के नेतृत्व में हुई खोज में पानी के अंदर किले जैसी दीवारें मिट्टी के बर्तन और दूसरी वस्तुएं मिली थीं. CSIR-NIScPR के प्रकाशित शोध में इनका उल्लेख किया गया था.
महाबलीपुरम : तमिलनाडु का महाबलीपुरम यानाी मामल्लपुरम के बारे में भी यह कहा जाता है कि पुराना महाबलीपुरम समुद्र में डूब गया था. पानी के अंदर कई बार इसकी संरचनाएं भी मिल चुकी हैं. भारत सरकार ने 2026 में इस शहर को उन स्थानों में शामिल किया जहां ASI की अंडरवाटर आर्कियोलॉजिकल विंग समुद्र के अंदर पुरातत्व संबंधी शोध कर रही है.
मुजिरिस: केरल का मुजिरिस प्राचीन भारत के सबसे अहम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाहों में माना जाता है. ऐसा कहा जाता है कि इसका संबंध रोमन साम्राज्य और पश्चिम एशिया के साथ समुद्री व्यापार से रहा होगा. इस पर अभी भी शोध जारी है. 2024 में यहां को लेकर एक रिसर्च प्रकाशित क इसमें समुद्र के स्तर और तलछट पर शोध किया गया था. इसमें सामने आया था कि समुद्र ने मुजिरिस क्षेत्र के विनाश में अहम योगदान निभाया होगा. रिसर्च में इसे पेरियार नदी के मुहाने के पास बताया गया, हालांकि यह बंदरगाह असल में कहां था इस पर अभी भी रिसर्च जारी है.
लोथल : गुजरात के लोथल शहर के बारे में आपने इतिहास में पढ़ा होगा. इसे हड़प्पा सभ्यता का प्रमुख बंदरगाह माना जाता था. यह शहर समुद्र के नीचे तो नहीं है, लेकिन जमीन पर भी इसके अवशेष ही रह गए हैं. हड़प्पा काल में लोथल समुद्री व्यापार के सबसे बड़े केंद्रों में से एक था. यूनेस्को के मुताबिक शहर की बाहरी दीवारों को इस तरह का बनाया गया था, जिससे समुद्र में आने वाले ज्वार भाटा का इस पर असर न हो. पुरातत्व विभाग के मुताबिक इसी तरह की समुद्री बाढ़ की वजह से ही शहर खत्म हुआ होगा.
समुद्र में कैसे समा जाते हैं शहर
वैज्ञानिकों के मुताबिक समुद्र का जलस्तर बदलता है, हालांकि इसकी रफ्तार इतनी धीमी होती है जो हजारों साल में नजर आती है. कई बार आई तेज सुनामी शहरों को तबाह कर देती है. खासतौर से पूम्पुहार के मामले में वैज्ञानिक शहर के तबाह होने की वजह सुनामी को ही मानते हैं. एक और जो सबसे बड़ा कारण माना जाता है वह नदी का रास्ता बदलना या नदी से होने वाले कटाव को माना जाता है. इस वजह से कई बार बंदरगाह की पूरी अर्थव्यवस्था खत्म् हो सकती है.