आगरा: देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के आगरा स्थित घर पर कांग्रेसियों ने जोरदार प्रदर्शन किया है, और ज्ञानेश कुमार के घर के गेट पर कालिख पोती है. साथ ही कांग्रेसियों की तरफ से ज्ञानेश कुमार के घर के बाहर जोरदार हंगामा करने के अलावा जमकर नारेबाजी भी की गई है. कांग्रेस के उत्तर प्रदेश संगठन के महासचिव अनिल यादव, मुकेश धनगर के नेतृत्व में यह प्रदर्शन हुआ है.
आगरा के विजय नगर में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का घर है. आज ज्ञानेश कुमार के घर के बाहर भारी संख्या में कांग्रेसी पहुंचे, और उन्होंने घर के बाहर गेट पर कालिख पोत दी, साथ ही गद्दार, वोट चोर जैसे शब्द का इस्तेमाल करते हुए गेट पर कालिख पोती. सूचना पर थाना पुलिस पहुंच गई, और कांग्रेसियों को समझा बुझाकर हटा दिया. इसके बाद पुलिस ने गेट पर पुती हुई कालिख को हटाया, साफ कर दिया.
सुरक्षा के लिहाज से घर के बाहर पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई है. बतादें कि केवल आगरा ही नहीं देश के अधिकांश जिलों में कांग्रेस चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन कर रही है.
कब और कैसे शुरू हुआ विवाद?
दरअसल, द इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक खबर के बाद यह पूरा विवाद शुरू हुआ. इस बीच निर्वाचन आयोग ने इस पूरे मुद्दे पर सफाई जारी करते हुए बुधवार को कहा कि उसके सभी आधिकारिक आदेश, फैसले और प्रशासनिक निर्देश पूरी तरह से कानूनी रूप से वैध हैं और किसी भी संस्थान में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां सामने आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है.
SIR के दौरान नाम हटाए जाने पर जताई आपत्ति
आयोग ने अंग्रेजी दैनिक ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक खबर के बाद जारी एक बयान में यह टिप्पणी की है. खबर में कहा गया है कि देशभर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने विभिन्न राज्यों में नाम हटाए जाने सहित कई मुद्दों पर आपत्ति जताई थी.
आयोग ने यह भी कहा कि निर्वाचन आयुक्तों द्वारा दिए गए सुझाव चुनावी प्रक्रियाओं में और सुधार के लिए थे. निर्वाचन आयोग ने कहा कि वह भारतीय लोकतंत्र को आगे बढ़ाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका को समझते हुए पूरी निष्ठा के साथ अपने संवैधानिक दायित्वों को निभाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.
आयोग ने बयान में क्या कहा?
बयान में कहा गया है, ‘आयोग द्वारा जारी सभी आधिकारिक आदेश, फैसले और प्रशासनिक निर्देश पूरी तरह से कानूनी रूप से वैध हैं और मुख्य निर्वाचन आयुक्त तथा अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और पदावधि) अधिनियम, 2023 के तहत स्थापित वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करते हैं.’
बयान के अनुसार, ‘मसौदा तैयार करने के चरण के दौरान आयोग के सदस्यों द्वारा उठाए गए किसी भी प्रक्रियागत सवाल या दिए गए सुझाव मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से अपनाई जाने वाली सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं. निर्वाचन आयुक्तों द्वारा दिए गए सुझाव चुनावी प्रक्रियाओं में और सुधार के लिए थे.’
बयान में कहा गया है कि किसी भी संस्थान में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां सामने आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है. अंतिम निर्णय लिए जाने से पहले वे निर्णय लेने की प्रक्रिया का ही हिस्सा होती हैं. केवल तीनों निर्वाचन आयुक्त ही नहीं, बल्कि आयोग का प्रत्येक अधिकारी भी चुनावी व्यवस्था में सुधार के लिए आयोग को अपने सुझाव देने के लिए पूरी तरह अधिकृत है.