पशुपालन करना है तो मान लें किसान की ये बात, अकेले ही संभाल लेंगे पूरे परिवार का खर्च, पढ़िए राजाराम की कहानी

पशुपालन करना है तो मान लें किसान की ये बात, अकेले ही संभाल लेंगे पूरे परिवार का खर्च, पढ़िए राजाराम की कहानी


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Goat Farming Business Benefits: किसान खेती के साथ पशुपालन में भी अच्छी-खासी कमाई कर सकते हैं और इसमें बकरी पालन सबसे अच्छी कमाई है. किसान राजाराम बताते हैं कि बकरी पालन में मेहनत, सही देखभाल और समय पर खान-पान का ध्यान रखना बेहद जरूरी है.

Sultanpur: सुल्तानपुर के पलियागोलपुर गांव में रहने वाले राजाराम आज बकरी पालन के जरिए अपनी अच्छी कमाई कर रहे हैं. कभी सामान्य तरीके से जीवन चलाने वाले राजाराम ने बकरी पालन को रोजगार का जरिया बनाया और धीरे-धीरे इसे अपने काम का हिस्सा बना लिया. खास बात यह है कि उन्होंने सीमित संसाधनों के साथ शुरुआत की और अनुभव के साथ अपने काम को आगे बढ़ाया. आज उनके पास कई बकरियां हैं, जिनसे उन्हें नियमित आमदनी होती है. राजाराम बताते हैं कि बकरी पालन में मेहनत, सही देखभाल और समय पर खान-पान का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. उनकी कहानी गांव के उन लोगों के लिए प्रेरणा बन सकती है, जो कम लागत में अपना रोजगार शुरू करना चाहते हैं.

20 साल से कर रहे बकरी पालन
सुल्तानपुर के पलियागोलपुर गांव के रहने वाले राजाराम पिछले करीब 20 साल से बकरी पालन का काम कर रहे हैं. कभी सामान्य तरीके से अपने परिवार का जीवन चलाने वाले राजाराम ने धीरे-धीरे बकरी पालन को ही रोजगार का जरिया बना लिया. सीमित संसाधनों के साथ शुरू किया गया यह काम आज उनके परिवार की आमदनी का बड़ा साधन बन चुका है. राजाराम ने शुरुआत में कुछ बकरियों से काम शुरू किया था, लेकिन अनुभव बढ़ने के साथ उन्होंने इसकी संख्या भी बढ़ाई. आज उनके पास 50 से अधिक बकरियां हैं. वह बताते हैं कि बकरी पालन में मेहनत के साथ धैर्य और लगातार देखभाल की जरूरत होती है.

50 से अधिक बकरियों से हो रही कमाई
राजाराम के पास इस समय 50 से अधिक बकरियां हैं. इन्हीं के पालन-पोषण से उन्हें अच्छी आमदनी हो रही है. उनका कहना है कि बकरी पालन ऐसा काम है, जिसे गांव में रहने वाला व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार छोटे स्तर से शुरू कर सकता है. इसके लिए सबसे जरूरी है कि बकरियों के रहने की जगह साफ-सुथरी हो और उन्हें समय पर पर्याप्त चारा और पानी मिलता रहे. राजाराम ने सालों के अनुभव से बकरियों की देखभाल के तरीके सीखे हैं. अब यही अनुभव उनके काम को आगे बढ़ाने में मदद कर रहा है.

बकरियों के बीमार होने पर बढ़ जाती है परेशानी
राजाराम लोकल 18 से बताते हैं कि बकरी पालन में सबसे बड़ी चुनौती उस समय आती है, जब बकरियां बीमार हो जाती हैं. बीमारी के दौरान उनकी सही देखभाल करना और समय पर इलाज कराना जरूरी होता है. एक बकरी के बीमार होने पर उसका असर पूरे काम पर पड़ सकता है. इसलिए वह बकरियों के खान-पान और स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखते हैं. उनका कहना है कि बकरी पालन से कमाई के लिए सिर्फ बकरियां पालना ही काफी नहीं है, बल्कि उनकी नियमित देखभाल करना भी उतना ही जरूरी है.

बच्चों की पढ़ाई का भी बना सहारा
राजाराम ने साल 1983 में हाईस्कूल की परीक्षा पास की थी. परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण वह आगे की पढ़ाई नहीं कर सके. इसके बाद उन्होंने मेहनत करके अपने परिवार की जिम्मेदारी संभाली. बकरी पालन से होने वाली आमदनी का इस्तेमाल उन्होंने अपने बच्चों की पढ़ाई में भी किया. राजाराम बताते हैं कि आज उनके दो बच्चे नौकरी कर रहे हैं. उनके लिए यह काम सिर्फ कमाई का जरिया नहीं, बल्कि परिवार के भविष्य को बेहतर बनाने का माध्यम भी रहा है. राजाराम की कहानी बताती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद मेहनत और लगातार प्रयास से गांव में रहकर भी रोजगार का मजबूत साधन तैयार किया जा सकता है.



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