दिल्ली: कमाई चाहे कितनी भी हो, अगर खर्च का हिसाब नहीं रखा जाए तो महीने के आखिर तक पैसे कम पड़ने लगते हैं. खासकर ऐसी चीजों पर खर्च बढ़ जाता है, जिनके बिना भी काम चल सकता है. कभी विंडो शॉपिंग, कभी बाहर खाना तो कभी अचानक घूमने का प्लान बजट बिगाड़ देता है. ऐसे में अगर आप अपनी बचत बढ़ाना चाहते हैं तो रोजमर्रा के खर्च में कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना जरूरी है.
दिल्ली के फेमस इकोनॉमिस्ट आकाश जिंदल के मुताबिक, सबसे पहले उन खर्चों को पहचानना चाहिए, जिन्हें आसानी से टाला जा सकता है. उनका कहना है कि घर के जरूरी खर्च जैसे राशन, बच्चों की स्कूल फीस और बुजुर्गों की दवाइयों को प्राथमिकता दें, लेकिन गैर-जरूरी खर्चों पर लगाम लगाएं.
विंडो शॉपिंग की आदत से बचें
कई बार हम सिर्फ सामान देखने के लिए बाजार या शॉपिंग मॉल जाते हैं, लेकिन वहां पहुंचने के बाद ऐसी चीजें भी खरीद लेते हैं. जिनकी जरूरत नहीं होती है. इसलिए बिना जरूरत के शॉपिंग करने या सिर्फ विंडो शॉपिंग के लिए जाने से बचना चाहिए. खरीदारी से पहले खुद से पूछें कि क्या यह सामान वास्तव में जरूरी है.
हर बार सिनेमा हॉल जाना जरूरी नहीं
परिवार के साथ फिल्म देखने का मन हो तो हर बार सिनेमा हॉल में हजारों रुपये खर्च करना जरूरी नहीं है. टिकट, खाना और आने-जाने का खर्च मिलाकर फिल्म का बजट काफी बढ़ सकता है. कुछ समय बाद वही फिल्म टीवी या किसी दूसरे प्लेटफॉर्म पर कम कीमत में या उपलब्धता के हिसाब से बिना अतिरिक्त खर्च के देखी जा सकती है. इससे मनोरंजन भी होगा और बजट भी नहीं बिगड़ेगा.
रेस्टोरेंट के बजाय घर पर बनाएं पसंदीदा खाना
दोस्तों या पड़ोसियों को रेस्टोरेंट में खाना खाते देखकर अक्सर हमारा भी बाहर खाने का मन करता है, लेकिन हर बार बाहर खाना बजट पर भारी पड़ सकता है. आकाश जिंदल के मुताबिक, आज इंटरनेट की मदद से घर पर भी कई तरह की डिश आसानी से बनाई जा सकती हैं. परिवार के लोग मिलकर खाना बनाएं तो कम खर्च में ज्यादा मात्रा में खाना तैयार किया जा सकता है.
घूमने के नाम पर हर बार बड़ा खर्च न करें
घूमना जरूरी नहीं कि हमेशा लंबी दूरी की यात्रा या महंगी पिकनिक हो. अगर हर बार टैक्सी या दूसरी सुविधा से सैकड़ों किलोमीटर दूर जाने का प्लान बनाया जाए तो आने-जाने में ही काफी पैसा खर्च हो सकता है. इसके बजाय आसपास की जगहों पर घूमने, पार्क जाने या कम खर्च वाले विकल्प तलाशने से भी परिवार के साथ अच्छा समय बिताया जा सकता है.
बच्चों की हर डिमांड पूरी करने से पहले सोचें
बच्चों की जरूरत और उनकी इच्छा में अंतर समझना भी जरूरी है. खासकर कपड़ों और फैशन के मामले में बच्चों की पसंद और ट्रेंड लगातार बदलते रहते हैं. ऐसे में हर नए ट्रेंड के पीछे पैसा खर्च करने के बजाय बच्चों को समझाएं कि पहले जरूरत की चीजें खरीदी जाएं. जरूरी कपड़ों की खरीदारी के बाद ही अतिरिक्त चीजों पर खर्च करने की आदत डालें.
जरूरी खर्च पहले, बाकी बाद में
इन छोटी-छोटी आदतों से महीने का बजट काफी हद तक संभाला जा सकता है. इसका मतलब यह नहीं कि मनोरंजन या परिवार के साथ बाहर जाना पूरी तरह बंद कर दें, बल्कि जरूरी और गैर-जरूरी खर्च के बीच फर्क करना जरूरी है. अगर हर महीने कुछ खर्च सिर्फ जरूरत के हिसाब से किए जाएं और बाकी खर्चों पर नियंत्रण रखा जाए, तो बचत के लिए पैसा निकालना आसान हो सकता है.